3 चीजें जो RCB की मैन्स टीम WPL 2024 की चैंपियन RCB की महिला टीम से सीख सकती है - क्रिकट्रैकर हिंदी

3 चीजें जो RCB की मैन्स टीम WPL 2024 की चैंपियन RCB की महिला टीम से सीख सकती है

महिला प्रीमियर लीग के दूसरे सीजन की चैंपियन है आरसीबी

Royal Challengers Bangalore Women (Image Credit- Twitter X)
Royal Challengers Bangalore Women (Image Credit- Twitter X)

करीब 16 साल के इंतजार के बाद आखिरकार राॅयल चैंलजर्स बैंगलोर (RCB) अपनी पहली ट्राॅफी जीतने में सफल रही है। बता दें कि आरसीबी ने महिला प्रीमियर लीग 2024 के फाइनल में दिल्ली कैपिटल्स को 8 विकेट से हराकर, पहली बार खिताब को अपने नाम किया है।

तो वहीं आरसीबी के यह ट्राॅफी बहुत ही ज्यादा खास होने वाली है, क्योंकि हो सकता है कि यह साल आरसीबी का साल हो। क्योंकि 17वें साल में आरसीबी ने मार्च महीने के 17वें दिन हुए फाइनल मैच में जीत हासिल की है।

यह फैंस का अपनी फ्रेंचाइजी में विश्वास ही था कि हर बार टीम के असफल होने पर, वे उसे दोबारा से फुल जोश के साथ सपोर्ट करते। हर साल आरसीबी का नारा रहता था कि ए साला कप नमदे (इस साल कप हमारा है), लेकिन अब यह ए साला कप नमदू (इस साल कप हमारा हो गया) हो गया है।

दूसरी ओर, आरसीबी की महिला टीम की इस जीत से आरसीबी की मैन्स टीम भी काफी कुछ सीख सकती है, जो आईपीएल के तीन फाइनल मैच खेलने के बाद एक बार भी ट्राॅफी नहीं जीत पाई है। आइए जानते हैं उन तीन सीखों के बारे में जो मैन्स टीम महिला टीम से सीख सकती है:

3. अपनी ताकत पर विश्वास रखना

महिला प्रीमियर लीग के पहले सीजन में सिर्फ 2 मैच जीतने वाली आरसीबी ने इस सीजन में अपनी गेंदबाजी में सुधार करने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने भले ही अपनी बैटिंग को कमजोर कर लिया हो, लेकिन अपनी गेंदबाजी को उन्होंने मजूबत किया, और उन्होंने अपनी इस ताकत पर विश्वास भी किया।

तो वहीं आरसीबी का यह फैसला उनके काम भी आया, क्योंकि टूर्नामेंट के टाॅप विकेट टेकर्स में आरसीबी के तीन गेंदबाज (श्रेयंका पाटिल, आशा शोभना और सोफी माॅलीन्यू) सबसे आगे थे। वे WPL के सबसे बढ़िया गेंदबाजी लाइन-अप में से एक थे। टीम ने 22 रन के अंतराल पर एक विकेट हासिल किया था।

तो वहीं आरसीबी की मैन्स टीम में एक सीरियस पेस अटैक है, लेकिन उन्हें अपनी गेंदबाजी लाइनअप पर चिन्नास्वामी जैसे होम ग्राउंड के बावजूद विश्वास दिखाना होगा।

2. ड्रेसिंग रूम में शांति

हमने अक्सर आईपीएल के मैचों के दौरान देखा है कि एक या दो हार के बाद आरसीबी के खेमे में काफी ज्यादा उठापटक देखने को मिलती है, जिसकी वजह से टीम मैदान पर छोटी-छोटी गलती करती हुई नजर आती है।

वूमेन टीम के साथ भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी, क्योंकि प्लेऑफ में पहुंचने के चांस बहुत कम थे। लेकिन अहम मैच में ऑलराउंडर एलिस पैरी ने शांति से काम लिया और प्रदर्शन करके दिया। मैदान पर उन्होंने अपने खेल का आनंद लिया, बिना इस बात की परवाह किए बिना कि मैच का क्या परिणाम होगा।

दूसरी ओर, पुरुष टीम प्लेऑफ में पहुंचने का इतना दबाव ले लेती है कि वे मैच को एन्जाॅय करना भूल जाते हैं और अहम मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ता है।

1. होम ग्राउंड को किला बनाओ

महिला प्रीमियर लीग में हमने देखा कि महिला टीम ने चिन्नास्वामी के होम क्राउड के सामने शानदार प्रदर्शन करके दिखाया और घर पर खेले गए 5 मैचों में से 3 मुकाबले में उन्होंने जीत हासिल की। लेकिन पुरुष टीम के आंकड़े होम ग्राउंड पर कम और अवे ग्राउंड पर ज्यादा बेहतर देखने को मिलते है।

आरसीबी को मुंबई और चेन्नई जैसी टीमों से सीखना चाहिए, जो घर पर शानदार खेल दिखाते हैं। अगर आगामी सीजन में आरसीबी अपने होम मैचो में बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रही, तो वह निश्चित तौर पर 16 साल के ट्राॅफी ना जीत पाने के अपने सूखे को खत्म कर सकती है।

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