क्या है ये DEXA स्कैन? आखिर क्यों इस टेस्ट के आते ही खिलाड़ियों की बढ़ी टेंशन?
अब टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए सभी क्रिकेटर्स को यो-यो और DEXA टेस्ट को पास करना होगा।
अद्यतन - Jan 3, 2023 12:07 pm

रविवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने 2022 में टीम के प्रदर्शन पर चर्चा करने के लिए कप्तान रोहित शर्मा, मुख्य कोच राहुल द्रविड़ और मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा के साथ एक रिव्यू मीटिंग की। बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी, सचिव जय शाह, और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण भी बैठक का हिस्सा थे, इस मीटिंग में टीम इंडिया के आने वाले टूर्नामेंट और बाकी चीजों पर चर्चा हुई थी।
बैठक के अंत के बाद बीसीसीआई ने कुछ बड़े ऐलान किया, जिसमें चयन मानदंड और वर्कलोड मैनेजमेंट जैसे बड़े मुद्दे शामिल है। टीम चयन के मापदंड को लेकर बात करें तो यो-यो टेस्ट की वापसी हो गई है। अब वे ही खिलाड़ी नेशनल टीम में चुने जाएंगे जो इस टेस्ट में पास होंगे। इसके साथ ही BCCI ने घोषणा की है कि खिलाड़ियों को सभी फॉर्मेट में चुने जाने से ठीक पहले डेक्सा (DEXA) स्कैन देना होगा।
भारतीय क्रिकेट फैंस को योयो टेस्ट की जानकारी है, लेकिन ये DEXA स्कैन सभी के लिए नया है। बहुत कम ऐसे फैंस होंगे जिन्हें इस डेक्सा के बारे में अच्छा से पता होगा। क्या होता है ये डेक्सा स्कैन आइए जानते हैं।
क्या है डेक्सा (DEXA) स्कैन?
DEXA का मतलब डुअल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्पियोमेट्री है। यह एक ऐसा स्कैन है जिसमें हड्डी की ताकत को मापने के लिए एक्स-रे तकनीक का का उपयोग करता है। साथ ही, यह टेस्ट पहले से ही हड्डी में किसी भी तरह के फ्रैक्चर की संभावना के बारे में बताता है।
इस टेस्ट में दो प्रकार की बीम बनती है जिसमें एक बीम की ऊर्जा काफी उच्च होती है, वहीं दूसरी बीम की ऊर्जा लो होती है. दोनों बीम हड्डियों के अंदर से गुजरकर एक्स-रे करते हैं जिससे पता चल जाता है कि हड्डियों की मोटाई कितनी है।
इसे बोन डेंसिटी टेस्ट भी कहा जाता है। इस टेस्ट से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि क्या किसी खिलाड़ी को शरीर के किसी हिस्से को फ्रैक्चर होने का खतरा है। यह बॉडी स्ट्रक्चर की मैपिंग करता है और शरीर में फैट और मांसपेशियों की स्थिति को भी जांचता है।
गौरतलब है कि, इस बीच, कोविड-19 बायो-बबल के अंदर खेलने के दौरान खिलाड़ियों के हाई लेवल की थकान के कारण, यो-यो टेस्ट को बीसीसीआई द्वारा पहले हटा दिया गया था। अब चूंकि किसी सीरीज के दौरान बायो बबल नहीं होता है, इसलिए बोर्ड ने फिर से फिटेनस स्टैंडर्ड को हाई रखने के लिए यो-यो टेस्ट को अनिवार्य कर दिया है।