गौतम गंभीर ने बढ़ाया आत्मविश्वास, साई सुदर्शन बोले ‘उनके भरोसे ने मुझे आजादी दी’
दिल्ली टेस्ट में शानदार प्रदर्शन के बाद साई सुदर्शन ने बताया कैसे गंभीर के शब्दों ने उनके खेल और सोच को बदल दिया।
अद्यतन - अक्टूबर 29, 2025 11:15 अपराह्न

टीम इंडिया के युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन ने हाल ही में अपने टेस्ट करियर की शुरुआत में आई मुश्किलों और भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर से मिली प्रेरणा के बारे में खुलकर बात की। साई सुदर्शन ने यह बयान ईएसपीएन क्रिकइंफो से बातचीत के दौरान दिया।
इंग्लैंड के खिलाफ अपनी डेब्यू सीरीज में सुदर्शन ने 140 रन बनाए थे, लेकिन लगातार अच्छे प्रदर्शन की कमी के कारण उन पर दबाव बढ़ गया था। वेस्टइंडीज के खिलाफ अहमदाबाद टेस्ट में केवल 7 रन पर आउट होने के बाद उन्हें लगा कि उनका आत्मविश्वास थोड़ा हिल गया है।
लेकिन दिल्ली में खेले गए दूसरे टेस्ट से पहले गंभीर से हुई बातचीत ने उनका पूरा नजरिया बदल दिया। सुदर्शन ने बताया गंभीर सर ने मुझसे कहा, तुम खेलोगे। जिस आत्मविश्वास से उन्होंने यह कहा, उसने मुझे आजादी और भरोसा दोनों दिया। उन्होंने समझाया कि दबाव लेने की जरूरत नहीं, बस खेल का मजा लो और टीम के लिए लड़ो।
गंभीर के भरोसे ने बदला साई सुदर्शन का नजरिया, अब लक्ष्य सिर्फ टीम की जीत
गंभीर की इन बातों का असर साई सुदर्शन के प्रदर्शन में साफ दिखा। उन्होंने दूसरे टेस्ट में शानदार 87 और 39 रन की पारियां खेलीं और भारत को सीरीज में 2-0 से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
सुदर्शन ने आगे कहा, पहले मैं रन बनाने के बारे में ज़्यादा सोचता था, लेकिन गंभीर सर से बात करने के बाद मेरा फोकस सिर्फ टीम को जीत दिलाने पर चला गया। जब मुख्य कोच खुद भरोसा जताते हैं, तो माहौल और आत्मविश्वास दोनों बदल जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अब वे खुद पर दबाव नहीं डालना चाहते कि उन्हें टीम में जगह पक्की करनी है। मैं हर मैच को एक नई चुनौती की तरह लेता हूँ। मेरा लक्ष्य सिर्फ एक ही है टीम के लिए खेलना और जीत में योगदान देना।
सुदर्शन ने यह भी स्वीकार किया कि नंबर 3 पर बल्लेबाजी करना आसान नहीं होता, क्योंकि वे आमतौर पर तमिलनाडु के लिए ओपनर के रूप में खेलते आए हैं। फिर भी, वे इस चुनौती को लेकर उत्साहित हैं।
उन्होंने कहा, नंबर 3 पर खेलना भी ओपनिंग जैसा ही है। फर्क सिर्फ स्थिति का है। हमें तैयार रहना चाहिए कि टीम जहाँ चाहे, वहाँ खेलें। मैं राहुल भाई जैसे खिलाड़ियों से सीखने की कोशिश करता हूँ, जो हर पोज़िशन पर ढल जाते हैं।
इस तरह सुदर्शन ने न सिर्फ अपने आत्मविश्वास को वापस पाया, बल्कि यह भी दिखाया कि सही मार्गदर्शन और भरोसे से कोई भी खिलाड़ी दबाव को ताकत में बदल सकता है।