'अभी बेस्ट आना बाकी है' लाॅर्ड्स में ऐतिहासिक सेंचुरी लगाने के बाद बोलीं यास्तिका भाटिया 

‘अभी बेस्ट आना बाकी है’ लाॅर्ड्स में ऐतिहासिक सेंचुरी लगाने के बाद बोलीं यास्तिका भाटिया 

लाॅर्ड्स में हुए एकमात्र टेस्ट मैच में यास्तिका शतक लगाने वाले पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं।

Yastika Bhatia (Image Credit- Twitter X)
Yastika Bhatia (Image Credit- Twitter X)

इंग्लैंड और भारत के बीच लाॅर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए ऐतिहासिक टेस्ट मैच में शतक जड़ने वाली, भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया (Yastika Bhatia) ने कहा है कि अभी उनका बेस्ट प्रदर्शन आना बाकी है।

बता दें कि घुटने की चोट से वापसी करते हुए लाॅर्ड्स में इंग्लैंड महिला टीम के खिलाफ दूसरी पारी में भारत के लिए उन्होंने 158 गेंदों में 113 रनों की शतकीय पारी खेली। भाटिया की इस शानदार पारी के चलते मुकाबले में भारत ने मेजबान टीम के सामने चौथी पारी में जीत के लिए 457 रनों का लक्ष्य रखा, जबाव में इंग्लैंड अपनी दूसरी पारी में 186 रनों पर सिमट गई व मुकाबला 270 रनों से हार गई।

यास्तिका भाटिया की प्रतिक्रिया

यास्तिका ने जीते के बाद एक न्यूज एजेंसी के हवाले से कहा- “यह यकीन करने लायक नहीं है क्योंकि छह महीने पहले मैं बिल्कुल अलग स्थिति में था, और अगर कोई मुझसे कहता कि मेरा नाम ऑनर्स बोर्ड पर होगा, तो मैं यकीन नहीं करती।”

यास्तिका ने आगे कहा “सबसे अच्छी चीजें अभी आनी बाकी हैं, मैंने हमेशा यही माना है। लेकिन अब तक का सफर बहुत अच्छा रहा है और मैंने मैदान पर अपने समय का आनंद लिया है। यह तो बस शुरुआत है, अभी बेस्ट आना बाकी है और मैं उसका बेसब्री से इंतजार कर रही हूं।”

यास्तिका भाटिया ने अपनी वापसी का श्रेय अपने परिवार को दिया

इसके अलावा, उन्होंने अपने परिवार, टीम के साथियों और सपोर्ट स्टाफ को उस चोट से उबरने में मदद करने का श्रेय दिया, जिसने उनके करियर को खतरे में डाल दिया था। पिछले साल अक्टूबर में उनके बाएं घुटने का ACL इंजरी हो गई थी। इस चोट के लिए सर्जरी की जरूरत थी और इसी वजह से वह भारत के घरेलू मैदान पर खेले गए आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2025 जीतने वाले अभियान में हिस्सा नहीं ले पाई थीं।

उन्होंने कहा, “बहुत से लोगों ने पर्दे के पीछे रहकर काम किया है मेरा परिवार, मेरे पिता, माँ और मेरी बहन – वे मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत और सहारा रहे हैं। मेरे कोच, घर पर मौजूद ट्रेनर, यहाँ का सपोर्ट स्टाफ और टीम के साथियों ने मेरा साथ दिया। साथ ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE), जहाँ मैंने रिहैब किया। उन सभी ने बहुत अहम भूमिका निभाई, उनके बिना यह सब मुमकिन नहीं हो पाता।”

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