श्रीलंका के इस पूर्व तेज गेंदबाज ने काॅमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा को हराकर जीता गोल्ड मेडल
आइए आपको इस खबर के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं
अद्यतन - अगस्त 1, 2026 4:33 अपराह्न

Glasgow Commonwealth Games 2026: स्काॅटलैंड के ग्लासको शहर में जारी काॅमनवेल्थ गेम्स से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बता दें श्रीलंका का पूर्व तेज गेंदबाज जो अब थ्रोअर एथलीट बन गया है, जिसका नाम रूमेश पाथिरगे (Rumesh Pathirage) है, उसने दो बार के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट व वर्ल्ड चैंपियन नीरज चोपड़ा को हराकर, जेवलिन फाइनल में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
हालांकि, इस खिलाड़ी को श्रीलंका क्रिकेट टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन, उन्होंने घरेलू स्तर पर श्रीलंका के लिए क्लब क्रिकेट खेला और आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद का भी हिस्सा रहा। तो वहीं, अब काॅमनवेल्थ गेम्स 2026 में उन्होंने जेवलिन में गोल्ड मेडल जीतकर एतिहास रच दिया है, क्योंकि यह श्रीलंका के काॅमनवेल्थ गेम्स इतिहास में जेवलिन एथलिटिक्स में पहला गोल्ड मेडल भी है।
फाइनल में उन्होंने 89.75 मीटर का रिकाॅर्ड थ्रो फेंककर इतिहास रचा और गोल्ड मेडल को अपने नाम किया। सिल्वर मेडल नीरज चोपड़ा (85.83 मीटर) के साथ उन्होंने यशवीर सिंह (85.41 मीटर) को पीछे छोड़ा, जिन्होंने ब्राॅन्ज पदक अपने नाम किया।
हालांकि, यह नतीजा चौंकाने वाला नहीं था क्योंकि यह श्रीलंकाई खिलाड़ी दुनिया का सबसे बेहतरीन जेवलिन थ्रोअर है। उनके नाम 92.62 मीटर का ‘वर्ल्ड लीड’ (दुनिया में सबसे लंबी दूरी का थ्रो) है और उन्होंने जिन भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है, उनमें से ज्यादातर जीती हैं।
रोम डायमंड लीग में, वह 2026 सीजन में 90 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले पहले जेवलिन थ्रोअर बने। 23 साल के इस खिलाड़ी ने गुरुवार रात रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर दूर भाला फेंककर, नया मीट रिकॉर्ड और श्रीलंका के लिए नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया, साथ ही ‘वर्ल्ड लीड’ भी हासिल की।
क्वालिफिकेशन राउंड के बाद, ओलंपिंक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने भी रूमेश की तारीफ की और कहा “वह एक अच्छा लड़का है। वह मेरा दोस्त है। इस साल उसने वाकई बहुत अच्छा थ्रो किया। यह अच्छी बात है कि वह श्रीलंका के लिए कुछ बेहतरीन कर रहा है।”
कौन है रूमेश पाथिरगे हैं (Who is Rumesh Pathirage?)
मीडियम पेसर से थ्रोअर बने रूमेश, अपने कोच टोनी प्रसन्ना की देखरेख में ट्रेनिंग करते हैं। रूमेश ने पहले एक इंटरव्यू में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया था, “कोच टोनी ने ही मुझे जेवलिन (भाला फेंक) से परिचित कराया। वे हमेशा कहते हैं कि अगर मैं बेसिक चीजों में माहिर हो जाऊं और उन्हें सही तरीके से करूं, तो मुझे इसका फायदा जरूर मिलेगा। वे सिर्फ एक कोच से कहीं बढ़कर हैं। वे मुझे न सिर्फ खेल के बारे में सिखाते हैं, बल्कि जिंदगी के बारे में भी सिखाते हैं।”
बता दें कि रूमेश जेवलिन एथलीट बनने से पहले क्रिकेट में 130 किमी/घंटा की रफ़्तार से बॉलिंग करते थे और एक बार U18 कैटेगरी में स्पीड गन पर 134 किमी/घंटा की रफ़्तार भी दर्ज की थी। वे ईशान मलिंगा से पीछे दूसरे स्थान पर रहे थे, जो श्रीलंका और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हैं।