बीसीसीआई को घरेलू मैचों के लिए क्यों नहीं मिल रहे टाइटल्स स्पॉन्सर? यहां जाने बड़ी वजह

बीसीसीआई को घरेलू मैचों के लिए क्यों नहीं मिल रहे टाइटल्स स्पॉन्सर? यहां जाने बड़ी वजह

बढ़ी कीमत और मौजूदा पार्टनर्स के अधिकारों के चलते स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया बनी चुनौतीपूर्ण

Indian Cricket Team (Image credit Twitter - X)
Indian Cricket Team (Image credit Twitter – X)

भारतीय क्रिकेट टीम के घरेलू मैचों के लिए नए टाइटल स्पॉन्सर की तलाश अभी भी जारी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने नए स्पॉन्सर के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन बिड जमा करने की आखिरी तारीख बीतने के बाद भी बोर्ड किसी कंपनी के साथ समझौते तक नहीं पहुंच सका है।

BCCI ने 20 जुलाई को टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। बोली जमा करने की आखिरी तारीख 13 अगस्त रखी गई थी। इसके बाद भी अब तक नए टाइटल स्पॉन्सर का ऐलान नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बोर्ड इस समय कई संभावित कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, BCCI संभावित स्पॉन्सर्स के साथ लगातार चर्चा कर रहा है। इनमें Google Gemini का नाम भी सामने आया है। इसके अलावा Spinny और SBI Life जैसी कंपनियों से भी बातचीत होने की खबर है। हालांकि, अभी तक किसी भी कंपनी के साथ अंतिम समझौता नहीं हुआ है। BCCI ऐसे ब्रांड की तलाश में है, जो बोर्ड की आर्थिक शर्तों और अन्य नियमों को पूरा कर सके।

BCCI के मौजूदा राइट्स होल्डर IDFC First Bank हर घरेलू मैच के लिए लगभग 4.2 करोड़ रुपये का भुगतान करता है। नए स्पॉन्सरशिप समझौते के लिए बोर्ड ने बेस प्राइस 4.75 करोड़ रुपये प्रति मैच रखी है। माना जा रहा है कि यह बढ़ी हुई कीमत संभावित कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन रही है।

नया समझौता दो साल के लिए होगा और इसकी अवधि 31 मार्च 2028 तक रहेगी। इस दौरान लगभग 35 घरेलू मैच खेले जाने की उम्मीद है, जिनमें 10 टेस्ट, 12 वनडे और 13 टी20 मुकाबले शामिल हैं।

कुछ कंपनियां नहीं लगा सकतीं बोली

BCCI ने इस बार कुछ खास क्षेत्रों की कंपनियों को बोली लगाने से भी बाहर रखा है। टायर, पेंट और स्पोर्ट्स अपैरल से जुड़ी कंपनियां इस स्पॉन्सरशिप के लिए आवेदन नहीं कर सकतीं। यह फैसला मौजूदा पार्टनर्स के अधिकारों की सुरक्षा के लिए लिया गया है। भारतीय टीम के साथ पहले से Apollo Tyres, Adidas और Asian Paints जुड़े हुए हैं।

BCCI ने बोली लगाने वाली कंपनियों के लिए आर्थिक मानक भी तय किए हैं। कंपनी का पिछले तीन वर्षों का औसत टर्नओवर या औसत नेटवर्थ कम से कम 100 करोड़ रुपये होना जरूरी है। ऐसे में हर कंपनी इस रेस में शामिल नहीं हो सकती। अब देखना होगा कि BCCI को भारतीय टीम के घरेलू मैचों के लिए कब नया टाइटल स्पॉन्सर मिलता है।

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