सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट बैट से था खास जुड़ाव, इसलिए खुद करते थे बदलाव?
तेंदुलकर ने बताया अपने बैट से खास जुड़ाव का राज
अद्यतन - सितम्बर 11, 2026 6:24 अपराह्न

क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) का बल्ले के साथ रिश्ता बेहद खास था। 24 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में सचिन ने 34,357 रन और 100 अंतरराष्ट्रीय शतक बनाए। मैदान पर उनकी शानदार बल्लेबाजी के पीछे उनकी कड़ी तैयारी और अपने उपकरणों को लेकर खास पसंद भी शामिल थी।
सचिन ने हाल ही में बताया कि वह अपने बल्ले को लेकर कितने सजग रहते थे। उन्होंने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह खुद कारपेंटरी किट की मदद से अपने बल्ले पर काम करते नजर आए। उनका कहना था कि वह बल्ले के आकार और वजन में छोटे-छोटे बदलाव खुद करते थे, ताकि वह उनके हाथों में बिल्कुल सही महसूस हो।
सचिन के लिए बल्ला सिर्फ क्रिकेट खेलने का सामान नहीं था। वह चाहते थे कि बल्ला उनके हाथ और खेलने के अंदाज के अनुसार हो। इसलिए वह जरूरत पड़ने पर खुद उसकी शेप और ग्रिप में बदलाव करते थे।
उनके लिए सबसे जरूरी चीज बल्ले के साथ आराम और सहजता थी। सचिन का मानना था कि जब खिलाड़ी किसी बल्ले के साथ पूरी तरह से जुड़ जाता है, तो उसे बार-बार बदलने की जरूरत नहीं होती।
क्यों इस्तेमाल करते थे भारी बल्ला?
सचिन अपने दौर के कई बल्लेबाजों की तुलना में थोड़ा भारी बल्ला इस्तेमाल करते थे। इसकी शुरुआत उनके बचपन से हुई। उन्होंने शुरुआती दिनों में अपने बड़े भाई अजीत का बल्ला इस्तेमाल किया था, जो उनके लिए काफी भारी था। धीरे-धीरे उन्हें उसी वजन की आदत हो गई और बाद में यही उनकी बल्लेबाजी का हिस्सा बन गया।
अपने आत्मकथा प्लेइंग इट माइ वे (Playing It My Way) में सचिन ने बताया था कि उन्हें कई बार हल्का बल्ला इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। उन्होंने कोशिश भी की, लेकिन वह सहज महसूस नहीं कर पाए। उनकी बल्लेबाजी की तकनीक और शॉट खेलने का तरीका भारी बल्ले के वजन के साथ अच्छी तरह से जुड़ा हुआ था।
बल्ला हाथ के हिस्से जैसा होना चाहिए: सचिन तेंदुलकर
सचिन के अनुसार, बल्लेबाज का बल्ला उसके हाथ का हिस्सा जैसा होना चाहिए। जब खिलाड़ी बल्ले के साथ पूरी तरह सहज हो जाए, तो मैदान, गेंदबाज या परिस्थिति जैसी चीजें उसके आत्मविश्वास को प्रभावित नहीं करतीं।
यही वजह थी कि सचिन अपने बल्ले को लेकर छोटी से छोटी बात पर ध्यान देते थे। उनके लिए यह केवल उपकरण नहीं, बल्कि उनकी बल्लेबाजी की पहचान का अहम हिस्सा था। शायद यही वजह रही कि वह वर्ल्ड क्रिकेट में इतने प्रख्यात हुए।
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