'मैंने सोचा शायद कभी दोबारा नहीं खेल पाऊंगी' ऑस्ट्रेलिया में कम्यूनिटी लेवल क्रिकेट खेलने की परमिशन मिलने पर अनाया बांगर 

‘मैंने सोचा शायद कभी दोबारा नहीं खेल पाऊंगी’ ऑस्ट्रेलिया में कम्यूनिटी लेवल क्रिकेट खेलने की परमिशन मिलने पर अनाया बांगर 

भारत के बजाए अब ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट में हिस्सा लेंगी अनाया बांगर

Anaya Bangar (Image Credit- Twitter X)
Anaya Bangar (Image Credit- Twitter X)

हाल में ही पूर्व भारतीय कोच व क्रिकेटर संजय बांगर की बेटी अनाया बांगर (Anaya Bangar) को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) से ऑस्ट्रेलिया में कम्यूनिटी लेवल पर क्रिकेट खेलने की अनुमति मिल गई है।

इस मंजूरी से उन्हें ‘क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की एलीट क्रिकेट में ट्रांसजेंडर और जेंडर डाइवर्स खिलाड़ियों को शामिल करने की पॉलिसी’ के तहत ऑस्ट्रेलिया के राज्यों और क्षेत्रों में प्रीमियर क्रिकेट प्रतियोगिताओं में खेलने की अनुमति मिल गई है।

बता दें अनाया ने 2022 में अपना ट्रांजिशन शुरू किया और मार्च 2026 में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी करवाई। कॉम्पिटिटिव क्रिकेट से दूर होने से पहले, उन्होंने अंडर-19 लेवल पर मुंबई का प्रतिनिधित्व किया था।

मार्च 2027 से एलीट क्रिकेट के लिए उनकी पात्रता जरूरी शर्तों को पूरा करने पर निर्भर करेगी, जिसमें यह पुष्टि करने के लिए ब्लड टेस्ट शामिल है कि सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर 10 nmol/L से कम बना रहे। इस रास्ते से ‘विमेंस बिग बैश लीग’ में खेलने की संभावना खुलती है। हालांकि, सिर्फ मंजूरी मिलने से ही किसी टीम में चुने जाने की गारंटी नहीं मिलती।

बांगर ने भारत में महिला क्रिकेट खेलने के मौकों के बारे में पता करने के लिए बीसीसीआई से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में खेलने का रास्ता चुना। तो वहीं, अब जब उनको दोबारा से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने का मौका मिला, तो उन्होंने अपनी खुशी जाहिर की और कहा उन्होंने सोचा नहीं था कि दोबारा क्रिकेट खेल पाऊंगी।

Anaya Bangar का रिएक्शन

इंडिया टुडे के हवाले से अनाया बांगर ने कहा “एक समय ऐसा भी आया जब मुझे सच में लगा कि मैंने हमेशा के लिए क्रिकेट खो दिया है। यह कोई अपने-आप होने वाली या अनौपचारिक प्रक्रिया नहीं थी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के पास महिलाओं के खेल में निष्पक्षता, प्रतिस्पर्धा की ईमानदारी और सबको शामिल करने के बीच संतुलन बनाने के लिए एक ढांचा है, और मेरे मामले पर उसी ढांचे के तहत विचार किया गया है। यह न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि मेरे जैसे दूसरे एथलीटों के लिए भी एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।”

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