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चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट की दुनिया में यह मुकाम इस तरह पाया, सब हुए कायल

पुजारा के परफेक्ट बल्लेबाज़ बनने की दास्तान

(Photo Source: Twitter)

टेस्ट क्रिकेट में भारतीय क्रिकेट टीम की बल्लेबाज़ी के आधार स्तंभ चेतेश्वर पुजारा ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाज़ी कौशल का नमूना पेश किया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट के पहले दिन एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को पस्त करते हुए शतकीय पारी खेली। पुजारा के प्रदर्शन में निरंतरता है और इस ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर वे अब तक 3 शतक लगा चुके हैं।

पुजारा की चर्चा हो रही है, ऐसे आइए जानते हैं कि आखिर पुजारा कैसे यहां तक पहुंचे। उनका शुरुआती सफर कैसा रहा और कौन से रास्तों से होकर उन्होंने यह मुकाम पाया है।

अंडर 14 में किया कमाल : यह साल 2000 का शरुआती समय था, जब क्रिकेट जगत में उस लड़के की चर्चा होने लगी जिसने अंडर-14 में तीन-सैकड़े जमा दिए थे। फिर देखा गया कि उसी लडके ने अंडर-19 में इंग्लैंड के खिलाफ दोहरा शतक जमा दिए। उस लड़के के ऊपर चर्चा और बढ़ गई जब वह अपने होम ग्राउंड राजकोट पर बॉलिंग अटैक की धज्जियां उड़ाने लगा।

रणजी ट्रॉफ़ी स्तर तक उसके रन बनाने की निरंतरता और क्षमता ऐसी थी कि ऐसा लगा खेल के नियम बदलने पड़ेंगे। कुछ ही सालों में ये लड़का बड़ा हो गया और हमने इसे चेतेश्वर पुजारा के नाम से जाना। अपने होम ग्राउंड पर रनों की बरसात करता यह बल्लेबाज जल्दी ही सेलेक्टर्स की नजर में चढ़ गया। आम और ख़ास में यह बात घर कर गई थी कि यह लड़का भारतीय टीम में राहुल द्रविड़ की टीम कमी पूरी कर देगा।

टेस्ट करियर का 18वां शतक : चेतेश्वर अरविन्द पुजारा घरेलू क्रिकेट में सौराष्ट्र की तरफ से खेलते हैं। वह दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं जिन्होंने अपना फर्स्ट क्लास करियर सौराष्ट्र के लिए 2005 में शुरू किया।

चेतेश्वर पुजारा ने भारत के ऑस्ट्रेलिया के साथ चल रहे चौथे टेस्ट के पहले दिन सिडनी में शानदार शतक लगाया। यह उनके टेस्ट करियर का 18वां शतक रहा। इस उपलब्धि के साथ वह भारत के वीवीएस लक्ष्मण से आगे निकल गए हैं। लक्ष्मण ने 17 शतक लगाए हैं।

पुजारा परिवार, क्रिकेट परिवार : 25 जनवरी 1988 को गुजरात के राजकोट में पुजारा का जन्म हुआ। उनके पिता अरविन्द पुजारा एक रणजी खेलने  वाले खिलाड़ी थे और सौराष्ट्र की तरफ से ही खेलते थे। बिपिन पुजारा के भतीजे हैं। उन्होंने भी रणजी ट्रॉफी में सौराष्ट्र की तरफ से खेला है। उनकी मां रीमा पुजारा और पिता ने बचपन में ही उनके अंदर की प्रतिभा को पहचान लिया। पुजारा अपने पिता के साथ ही खेल की प्रेक्टिस करते थे और इसी दौरान उन्होंने बीबीए की पढ़ाई पूरी की। जब पुजारा  17 साल के थे तब उनकी मां का कैंसर से निधन हो गया। पुजारा ने 13 फरवरी 2013 को पूजा पाबारी से शादी की।

क्रिकेट की शुरूआत : पुजारा ने अंडर-19 में टेस्ट क्रिकेट करियर की शुरुआत इंग्लैंड के खिलाफ 2005 में की। पारी की शुरूआत कर पुजारा ने 211 रन का स्कोर किया। उनके शानदार खेल की बदौलत इंडियन टीम ने एक पारी और 137 रन से इस मैच में जीत दर्ज की। पुजारा को 2006 में भी अंडर-19 के क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम के लिए चुना गया। वर्ल्ड कप में पुजारा ने बढ़िया प्रदर्शन किया और सबसे ज्यादा रन बनाए। उन्होंने 6 पारियों में 349 रन बनाए। इनमें तीन अर्धशतक और एक शतक शामिल है। वह मेन ऑफ़ द टूर्नामेंट बनाए गए।

घरेलू क्रिकेट की शुरुआत : पुजारा ने अपने घरेलू करियर की शुरुआत मध्यप्रदेश के खिलाफ रणजी ट्रॉफी से की। पहले मैच में पुजारा ने 221 बॉल खेलकर 10 और नाबाद 203 रन बनाए। अगले मैच में कर्नाटक के खिलाफ पुजार ने 37 और 352 रन बनाए। इस प्रदर्शन के बाद पुजारा को भारत की नेशनल टीम में खेलने के लिए बुलाया गया टीम वह आख़िरी 11 के लिए सिलेक्ट नहीं हुए।

2013 में पुजारा ऐसे नौंवे बल्लेबाज बन गए जिसने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तीन ट्रिपल-सेंचुरी लगा दी थीं।
पुजारा के नाम एक महीने के समय में तीन ट्रिपल-सेंचुरी लगाने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।

आईपीएल में करियर की शुरूआत :पुजारा को कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल के पहले तीन साल अपनी टीम में शामिल किया। 2011 की नीलामी में उन्हें रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने खरीद लिया। इसी दौरान वह चोट ग्रस्त हो गए और करीब एक साल तक खेल न  सके।2015 में पुजारा को किसी टीम ने नहीं खरीदा।

ऐसा रहा डेब्यू : टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत : 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पुजारा को भारतीय टीम में शामिल किया गया। पुजारा को युवराज सिंह के स्थान पर भारतीय टेस्ट टीम में चुना गया था। सीरीज के दूसरे टेस्ट से पुजारा ने डेब्यू किया। पुजारा ने 4 रन बनाए और आउट हो गए। दूसरी पारी में पुजारा को तीसरे स्थान पर भेजा गया। भारत को जीत के लिए 207 रनों की जरूरत थी और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी थे। पुजारा ने 72 रन बनाए।

2012 में पुजारा फिर से टीम में शामिल किए गए  और अपने करियर का पहला शतक उन्होंने बनाया। 2013 में पुजारा दूसरे सबसे तेज भारतीय खिलाड़ी बने जिसने 1000 रन बनाए थे। पुजारा दुनिया में 12वें तेजी से 1000 रन पूरे करने वाले खिलाड़ी हैं।

फॉर्म बिगड़ा : पुजारा को 2014 में भारतीय टीम का हिस्सा इंग्लैंड के खिलाफ 16 सदस्यों की टीम के लिए बनाया गया। यह सीरीज पुजारा के लिए अच्छी नहीं रही और उनका फॉर्म बिगड़ा नजर आया। अच्छी शुरुआत लेने के बाद भी वह
आखिर तक अच्छे रन नहीं बना पा रहे थे। उन्हें एकदिवसीय टीम में जगह नहीं मिली।

अच्छे फॉर्म में वापसी : 2016–17 में ऑस्ट्रेलिया के भारत टूर के पहले टेस्ट मैच में दोनों पारी में जल्दी आउट होने के बाद, पुजारा ने दूसरे मैच में अच्छा खेल दिखाया।

टीम ने यह मैच जीत लिया और पुजारा का उसमें बड़ा योगदान था। तीसरे मैच में पुजारा ने 202 रन बनाए। पुजारा को मेन ऑफ़ द मैच घोषित किया गया। इस सीजन आखिर तक पुजारा  आईसीसी की रैकिंग में चौथे स्थान पर थे।

पुजारा के नाम रिकॉर्ड

1. पुजारा ने एक साथ में 2000 रन बनाए। फर्स्ट क्लास मैचों में 2013 पुजारा ने 2,043 रन बनाए। उनसे ज्यादा
रन सिर्फ क्रिस रोजर ने 2013 में ही बनाए थे।

2. विराट कोहली के साथ उनकी 222 रनों की पार्टनरशिप साउथ अफ्रीका में भारतीयों द्वारा तीसरे स्थान की सबसे
बड़ी पार्टनरशिप है।

3. पुजारा ने भारतीय क्रिकेटर द्वारा दूसरे स्थान पर सबसे तेज 1000 रन बनाए हैं।

4. वह भारत के तीसरे और दुनिया ने नौंवे ऐसे क्रिकेटर हैं, जिसने किसी टेस्ट के पांचों दिन बल्लेबाजी की है।

5. वह भारत के छठवें नंबर के ऐसे खिलाड़ी हैं, जिसने एशिया के बाहर डेब्यू मैच में सैकड़ा जमाया है।

Neesham

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