टी-20 वर्ल्ड कप 2022: हल्की बूंदाबांदी और मैच रद्द, अंपायरों के फैसलों से खुश नहीं है फारुख इंजीनियर
भारत के पूर्व क्रिकेटर फारुख इंजीनियर का मानना है कि अंपायरों को हल्की बारिश की वजह से मैच को रोकना नहीं चाहिए और उनको मैच को पूरा करने के लिए थोड़ी और मेहनत करनी चाहिए।
अद्यतन - Oct 28, 2022 1:38 pm

भारत के पूर्व क्रिकेटर फारुख इंजीनियर का मानना है कि अंपायरों को हल्की बारिश की वजह से मैच को रोकना नहीं चाहिए और उनको मैच को पूरा करने के लिए थोड़ी और मेहनत करनी चाहिए। बता दें, इस समय चल रहे टी-20 वर्ल्ड कप 2022 टूर्नामेंट में बारिश की वजह से कई मुकाबलों के रिजल्ट पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
कुछ मुकाबले रद्द भी कर दिए गए है। दक्षिण अफ्रीका और जिंबाब्वे के बीच भी मुकाबले को रद्द कर दिया गया था और आज यानी 28 अक्टूबर को आयरलैंड और अफगानिस्तान के बीच मुकाबले को भी लगातार बारिश के चलते रद्द कर दिया गया।
लगातार बारिश के चलते न्यूजीलैंड और अफगानिस्तान के बीच मुकाबले को भी बिना गेंद फेंकें रद्द करना पड़ा था। टी-20 वर्ल्ड कप काफी मुख्य टूर्नामेंट है और इसमें टीमों के नेट रन रेट पर खासा प्रभाव पड़ेगा।
अंपायरों को खेल को शुरू करने के लिए थोड़ी और मेहनत करने की जरूरत है: फारुख इंजीनियर
फारुख इंजीनियर के मुताबिक फुटबॉल खेल में हल्की बारिश होने के बावजूद मुकाबले को जारी रखा जाता है। ऐसा ही अंपायरों को क्रिकेट में भी करना चाहिए।
फारुख इंजीनियर ने क्रिक्ट्रैकर के शो रन की रननीति में कहा कि, ‘मुझे लगता है कि अंपायरों को खेल शुरू करने के लिए अधिक प्रयास करना चाहिए। फुटबॉल में बहुत हल्की बूंदाबांदी के बावजूद भी खेल को जारी रखा जाता है, मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि क्रिकेट को इतना लाड़ प्यार क्यों मिल रहा है? अगर हल्की बारिश भी हो रही है तो यह दोनों टीमों पर असर डालेगी।
देखिए आपको गेंद गीली मिलेगी लेकिन आपके पास उसे सोकने का भी इंतजाम है। कोशिश कीजिए कि ज्यादा से ज्यादा ओवर फेंके जा सके। उन दर्शकों के बारे में भी सोचे जो मैदान पर या टीवी पर इस मैच देख रहे हैं और साथ ही रेडियो पर इस मैच को सुन रहे हैं।’
फारुख इंजीनियर ने आगे कहा कि, ‘तमाम दर्शक इस खेल को देखते हैं और इसकी लाभ और हानि दोनों टीमों को मिलेगी। थोड़ी बूंदाबांदी होती नहीं है कि खेल को रोक दिया जाता है, मैं इसके खिलाफ हूं। ICC को थोड़े मजबूत अंपायरों की जरूरत है जो कड़े फैसले ले सके।’