मुरली विजय ने वीरेंद्र सहवाग की आड़ में साधा एमएस धोनी पर निशाना!
मुरली विजय ने साल 2018 के बाद से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला है।
अद्यतन - जनवरी 17, 2023 3:30 अपराह्न

मुरली विजय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की आलोचना करने के बाद सुर्खियों में छाए हुए हैं। विजय, जिन्होंने साल 2018 के बाद से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला है, ने हाल ही में कहा कि उन्होंने बीसीसीआई से कुछ भी उम्मीद करना बंद कर दिया है, क्योंकि वे उम्र के कारण घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी मौका नहीं देना चाहते, इसलिए अब वह विदेशों में अपने लिए अवसरों की तलाश करेंगे।
अब मुरली विजय ने पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी और टीम मैनेजमेंट को अपना निशाना बनाया है। अनुभवी क्रिकेटर ने भारतीय क्रिकेट टीम प्रबंधन द्वारा उनके साथ किए गए भेदभाव को लेकर बात करते हुए कहा कि उन्हें कभी भी टीम में उनकी जगह को लेकर सुरक्षित महसूस नहीं कराया गया और न ही उन्हें उतना समर्थन मिला।
मुरली विजय ने एमएस धोनी और टीम के खिलाफ किया चौंकाने वाला दावा
भारतीय सलामी बल्लेबाज ने आगे कहा अगर उन्हें वीरेंद्र सहवाग की तरह सपोर्ट किया जाता, तो आज उनका करियर कुछ और होता। आपको बता दें, वीरेंद्र सहवाग ने सौरव गांगुली के नेतृत्व में अपने करियर का सबसे अधिक क्रिकेट खेला और पूर्व कप्तान ने उन्हें प्लेइंग इलेवन में अपनी जगह की चिंता किए बिना उनका नेचुरल खेल खेलने के लिए सपोर्ट किया, और विजय ने कहा उन्हें ये चीज कभी नसीब नहीं हुई।
विजय को लगता है कि वीरेंद्र सहवाग को भारतीय टीम प्रबंधन और कप्तान से जिस तरह का सपोर्ट मिला, अगर उन्हें भी ऐसे ही सपोर्ट मिलता, तो उनका करियर आज कुछ और होता। मुरली विजय ने स्पोर्टस्टार के शो वेडनेसडेज विद डब्ल्यूवी रमन में कहा: ‘अगर मैं ईमानदारी से कहूं तो मुझे वीरेंद्र सहवाग जैसी आजादी नहीं मिली। सहवाग ने अपने करियर में जो कुछ भी हासिल किया, मैं वो नहीं कर पाया। अगर मुझे भी सहवाग की तरह समर्थन मिलता, तो मैं भी कुछ नया ट्राई कर सकता था।
मुद्दा बस यह है कि आपके पास टीम का समर्थन होना चाहिए, जो मेरे पास नहीं था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपके पास अलग-अलग तरीकों से प्रयोग करने के ज्यादा मौके नहीं होते हैं। आपको लगातार प्रदर्शन करना होता है, इसलिए आपके पास सब कुछ एक पैकेज के रूप में होना चाहिए। जब सहवाग वहां थे तो मुझे लगा कि अपनी सहज प्रवृत्ति को नियंत्रित करना और अपना नेचुरल क्रिकेट खेलना कठिन है, लेकिन उन्हें इस तरह की आजादी मिलते हुए देखना शानदार था।’