टीम सिलेक्शन पर पूर्व कोच रवि शास्त्री ने उठाए सवाल, कहा- कप्तान और कोच को मिले ज्यादा अधिकार - क्रिकट्रैकर हिंदी

टीम सिलेक्शन पर पूर्व कोच रवि शास्त्री ने उठाए सवाल, कहा- कप्तान और कोच को मिले ज्यादा अधिकार

रवि शास्त्री के कार्यकाल में भारत एक भी ICC खिताब अपने नाम नहीं कर पाया है।

Ravi Shastri
Ravi Shastri. (Photo by Satyabrata Tripathy/Hindustan Times via Getty Images)

टीम इंडिया के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने टीम सेलेक्शन को लेकर बड़ा बयान दिया है। रवि शास्त्री का मानना है कि किसी भी दौरे के लिए जब टीम चुनी जाए, तो उसमें कप्तान और कोच की भी बात को महत्त्व दिया जाना चाहिए। रवि शास्त्री का ये बयान तब आया है, जब हाल ही में सेलेक्टर्स ने विराट कोहली को वनडे की कप्तानी से हटा दिया गया था।

शास्त्री और कोहली की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें टीम इंडिया ने कुछ ऐतिहासिक जीत दर्ज की। शास्त्री के कार्यकाल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया को दो बार उनके घर में हराया। वहीं इस साल इंग्लैंड में खेले गए टेस्ट सीरीज में भी टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था और सीरीज स्थगित होने से पहले 2-1 की बढ़त प्राप्त कर ली थी।

टीम सिलेक्शन को लेकर रवि शास्त्री ने क्या कहा ?

इस बीच टीम सिलेक्शन को लेकर स्टार स्पोर्ट्स के शो पर बातचीत करते हुए रवि शास्त्री ने कहा कि, “मुझे लगता है कि चयन प्रक्रिया में कोच और कप्तान को ज्यादा महत्व दिया जाए। इसे आधिकारिक रूप से अमल में लाया जाना चाहिए। जब कोच अनुभवी हो तो यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। मैं था, राहुल द्रविड़ हैं और कप्तान को भी बोलने का हक देना चाहिए।”

शास्त्री ने आगे कहा कि, “मैं विश्व कप के लिए तीन विकेटकीपर चुने जाने से सहमत नहीं था। या तो अंबाती रायडू या श्रेयस अय्यर टीम में आ सकते थे। एमएस धोनी, ऋषभ पंत, और दिनेश कार्तिक को रखने का क्या तर्क था? लेकिन मैंने कभी भी चयनकर्ताओं के काम में हस्तक्षेप नहीं किया। जब मुझसे राय मांगी गई तब मैंने उन्हें अपना जवाब दिया।”

इस मुद्दे पर पूर्व बल्लेबाजी कोच संजय बांगर ने अपनी राय देते हुए कहा कि, “जब आप एक भारतीय टीम चुन रहे होते हैं तो मुझे लगता है कि चयनकर्ताओं का अंतिम अधिकार होता है, लेकिन वो हमेशा कप्तान और मुख्य कोच के साथ चर्चा में रहते हैं। जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वे आम तौर पर एक सामूहिक निर्णय बन जाते हैं, न कि किसी एक व्यक्ति का निर्णय।”