एशियन गेम्स 2026 में DRS क्यों नहीं हो रहा इस्तेमाल? जान लीजिए इसके पीछे की वजह

एशियन गेम्स 2026 में DRS क्यों नहीं हो रहा इस्तेमाल? जान लीजिए इसके पीछे की वजह

DRS की लागत और लॉजिस्टिक्स बनी बड़ी वजह।

No DRS at Asian Games 2026 (Image credit Twitter - X)
No DRS at Asian Games 2026 (Image credit Twitter – X)

एशियन गेम्स 2026 में क्रिकेट मुकाबले बिना डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) के खेले जा रहे हैं। पुरुष और महिला दोनों क्रिकेट टूर्नामेंट में टीमों को अंपायर के फैसले को चुनौती देने के लिए DRS का इस्तेमाल करने की सुविधा नहीं दी गई है। महिला क्रिकेट में भारत ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि श्रीलंका ने सिल्वर और पाकिस्तान ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

हालांकि, एशियन गेम्स में DRS की गैर-मौजूदगी क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बता दें कि DRS के लिए कई आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञों की जरूरत होती है। इसमें गेंद की ट्रैकिंग के लिए विशेष कैमरे, UltraEdge जैसी तकनीक और रिप्ले से जुड़े उपकरण शामिल होते हैं। इसके अलावा इन सभी तकनीकी व्यवस्थाओं को संभालने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भी जरूरत होती है।

मल्टी स्पोर्ट्स प्रतियोगिता होने के कारण एशियन गेम्स में इन सुविधाओं को अलग से तैयार करना आसान नहीं होता। क्रिकेट के लिए इस्तेमाल होने वाले मैदानों पर DRS की तकनीक को लगाना, उसकी जांच करना और पूरे टूर्नामेंट के दौरान उसे संचालित करना अतिरिक्त समय और संसाधनों की मांग करता है।

DRS की लागत भी बड़ी वजह

DRS सिस्टम को इस्तेमाल करने में काफी खर्च आता है। आमतौर पर द्विपक्षीय सीरीज या बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में कई मैच होने के कारण इसका खर्च आयोजकों और ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स के बीच बांटा जाता है।

लेकिन एशियन गेम्स जैसे मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में क्रिकेट पूरे कार्यक्रम का केवल एक हिस्सा होता है। ऐसे में सीमित मुकाबलों के लिए पूरा DRS सिस्टम लगाने का खर्च आयोजकों के लिए ज्यादा हो सकता है।

एशियन गेम्स में कई मैदानों का इस्तेमाल अलग-अलग खेलों के लिए किया जाता है। ऐसे में क्रिकेट की तकनीकी जरूरतों के मुताबिक पूरे मैदान और उपकरणों को अस्थायी रूप से बदलना अतिरिक्त लॉजिस्टिक चुनौती पैदा करता है।

DRS नहीं होने की वजह से खिलाड़ियों और टीमों के पास अंपायर के फैसले को चुनौती देने का कोई विकल्प नहीं होगा। LBW, कैच या रन आउट जैसे करीबी फैसले अंपायर के निर्णय के साथ ही अंतिम माने जाएंगे।

इस स्थिति में खिलाड़ियों को मैदान पर अंपायर के फैसलों को स्वीकार करते हुए खेलना होगा। मल्टी-स्पोर्ट प्रतियोगिताओं में DRS का नहीं होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन पदक दांव पर होने के कारण करीबी फैसलों पर इसका असर जरूर चर्चा में रहेगा।

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