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इस ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को रिकॉर्ड भी सलाम करते हैं, सीमित अवसरों में कर दिखाया कमाल

स्टेफन रोजर वॉ या स्टीव वॉ ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर हैं। वह दाएं हाथ के बल्लेबाज और मीडियम पेस गेंदबाज हैं। उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी लगातार सोलह टेस्ट क्रिकेट जीत में से पंद्रह में जीत दर्ज की। इसके अलावा उनके कप्तान रहते हुए 1999 का विश्वकप भी ऑस्ट्रेलिया ने जीता।

2 जून 1965 को जन्मे स्टीव वॉ ने अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरूआत 1984 में की। 1999 से 2004 तक वॉ ऑस्ट्रेलिया टीम के कप्तान रहे। इसी दौरान उन्होंने 168 खेलकर सबसे ज्यादा मैच खेलने का रिकॉर्ड भी बनाया। उनके इस रिकॉर्ड को 2010 में भारत के सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा।स्टीव वॉ को करियर की शुरूआत में बहुत बढ़िया खिलाड़ी नही माना गया। यहां तक कि टेस्ट क्रिकेट में उन्हें टीम से बाहर कर उनके जुड़वा भाई मार्क वॉ को जगह दी गई लेकिन बाद में स्टीव वॉ अपने समय के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक बनकर उभरे। वह उन 12 खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाए हैं। करियर की शुरुआत स्टीव वॉ और उनसे 4 मिनिट छोटे मार्क वॉ 6 साल की उम्र में फुटबॉल, टेनिस और क्रिकेट खेलने लगे थे। स्टीव वॉ ने अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरूआत 1984 में न्यू साउथ वेल्स के लिए नौवे नंबर के बल्लेबाज और मध्यगति के गेंदबाज के तौर पर की।

इनके टेस्ट करियर की शुरुआत भारत के खिलाफ 1985-86 में हुई। इस मैच में वॉ में 13 और 5 रन बनाए। उन्होंने पहली पारी में 36 रन देकर 2 विकेट झटके। पहले मैच में अच्छा प्रदर्शन न कर पाने के बाद भी उन्हें न्यूजीलैंड टूर के लिए टीम में जगह मिली। सीरीज के दूसरे मैच में उन्होंने 74 रन बनाकर और 56 रन देकर 2 विकेट आउट कर बढ़िया प्रदर्शन किया। पूरी सीरीज के लिए उनका औसत 17.40 था।

वॉ वन डे फॉर्मेट में बेहतर साबित हुए। न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने पहले मैच में उन्होंने 13 देकर 1 विकेट झटका और एक बढ़िया कैच पकड़ा। उन्हें चार मैचों की सीरीज में हर मैच में खिलाया गया। करियर के शुरुआती दौर में उनका प्रदर्शन कमजोर रहने के बावजूद सिलेक्टर्स उन्हें चुनते रहे। उन्हें बल्लेबाज के तौर पर टीम में चुना जाता लेकिन उन पर गेंदबाजी के भारी जिम्मेदारी होती थी। उनके टेस्ट करियर के 13वे मैच में पहली बार ऐसा हुआ जब स्टीव वॉ के टीम में रहते हुए कोई मैच ऑस्ट्रेलिया ने जीता।

अपने करियर के शुरुआती दौर में वॉ एक स्वभाविक स्ट्रोक प्लेयर थे जिसे बैकफुट से शॉट लगाना पसंद था। वह जल्दी रन बनाते थे लेकिन टेस्ट लेवल में प्रदर्शन में लगातार अच्छा नहीं था। वह एकदिवसीय फॉर्मेट में बढ़िया प्रदर्शन करते थे। कम समय के खेल में पारी के बाद के ओवर में तेजी से रन बनाते थे। उन्हें आखिर के ओवरों में गेंद दी जाती थी और वे बल्लेबाजों के लिए रन बनाना मुश्किल कर देते थे।

1987 विश्वकप

1987 विश्वकप वॉ के करियर में नया मोड़ साबित हुआ। भारत के खिलाफ गेंदबाजी में वॉ ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए आखिर के ओवरों में मनिंदर सिंह को आउट कर अपनी टीम को 1 रन से मैच जिताया। जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में 45 रन बनाने के अलावा वॉ ने 6 ओवर में सिर्फ 7 रन दिए। ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 96 रन से जीता। ऐसे ही विश्वकप के दौरान वॉ का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा।

टीम से बाहर

1990–91 में ऐशेज सीरीज में वॉ का फॉर्म खराब हो गया। स्टीव वॉ को चौथे टेस्ट के लिए टीम से निकाल दिया गया। उनकी जगह उनके जुड़वा भाई मार्क वॉ को टीम में जगह मिले। जिन्होंने अपने पहले ही मैच में शतक जमाया। दूसरी तरफ स्टीव वॉ वन डे टीम का हिस्सा बने रहे। त्रिनिदाद में 1991 में तीसरे टेस्ट के लिए उन्हें फिर टीम में जगह मिली।

इस तरह वे और मार्क वॉ पहली जुड़वा भाइयों के जोड़ी बने टेस्ट मैच में साथ में खेले। स्टीव वॉ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके और उन्हें पांचवे टेस्ट के लिए टीम से फिर निकाल दिया गया। वॉ अठारह महीनों तक टेस्ट टीम ने शामिल नहीं किए गए।

संन्यास

करियर में इतनी ऊचाईयों को छूने के बाद भी वॉ का करियर कुछ कड़वाहट के साथ ख़त्म हुआ। 2002 में वीबी सीरीज में ऑस्ट्रेलिया फायनल में जगह नहीं बना पाया। दोनों वॉ भाइयों को टीम से निकाल दिया गया। स्टीव से कप्तान छीन ले गयी। मार्क ने इंटरेनशनल क्रिकेट से रिटारर्मेंट ले लिया। स्टीव वॉ टेस्ट टीम में बने रहे। इसी बीच रिकी पोंटिंग तेजी से उभर रहे थे और 2003 में उनके रहते टीम ने वर्ल्ड कप जीत लिया। अब स्टीव वॉ पर दबाव था और 2003-04 में स्टीव वॉ ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

रिकॉर्ड और अवार्ड

1. स्टीव वॉ के नाम टेस्ट में नंबर 5 पर सबसे अधिक शतक लगाने का रिकॉर्ड है।

2. टेस्ट क्रिकेट में नंबर 6 सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड स्टीव वॉ के नाम दर्ज है।

3. स्टीव वॉ 30वे ऐसे क्रिकेटर हैं जिसे ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया गया है।

4. साल 2000 में उन्हें ऑस्ट्रेलियन स्पोर्ट्स मेडल दिया गया।

5. 2004 में वॉ को ऑस्ट्रेलियन ऑफ़ द ईयर का अवार्ड उनके क्रिकेट करियर और समाज सेवा के लिए दिया गया।

Chennai Super Kings player Faf du Plessis, Mark Wood, and David Willey during a practice session in Mohali. (Photo by Surjeet Yadav/IANS)

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