"हर खिलाड़ी खुद को टीम का अहम हिस्सा मानता था" - टेस्ट कप्तानी पर विराट कोहली ने की खुलकर बात

“हर खिलाड़ी खुद को टीम का अहम हिस्सा मानता था” – टेस्ट कप्तानी पर विराट कोहली ने की खुलकर बात

आरसीबी पॉडकास्ट के एक टीजर में विराट ने बताया कि उस समय टीम में मौजूद ज्यादातर खिलाड़ी लगभग एक ही उम्र के थे।

virat kohli (Image credit Twitter - X)
virat kohli (Image credit Twitter – X)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने हाल ही में अपने टेस्ट करियर और कप्तानी के दिनों को याद करते हुए कई दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का वह दौर सिर्फ जीतों तक सीमित नहीं था, बल्कि टीम के हर खिलाड़ी के भीतर जिम्मेदारी और टीम को आगे बढ़ाने की भूख थी। यही वजह रही कि भारत ने विदेशी धरती पर भी ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कीं।

युवा खिलाड़ियों की सोच ने बदली टीम इंडिया की तस्वीर

आरसीबी पॉडकास्ट के एक टीजर में विराट ने बताया कि उस समय टीम में मौजूद ज्यादातर खिलाड़ी लगभग एक ही उम्र के थे। चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और सभी के बीच दोस्ती जैसा रिश्ता था।

विराट ने कहा कि टीम में सीनियर और जूनियर का फर्क बहुत कम महसूस होता था। हर खिलाड़ी खुद को टीम का अहम हिस्सा मानता था और सभी के मन में यही सोच थी कि आने वाले कई सालों तक भारतीय टेस्ट टीम को दुनिया की सबसे मजबूत टीम बनाना है। यही कारण था कि खिलाड़ी खुद से सवाल पूछते थे कि वे टीम को बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकते हैं।

विराट की कप्तानी में बना भारत का दबदबा

विराट कोहली की कप्तानी भारतीय टेस्ट इतिहास की सबसे सफल कप्तानियों में गिनी जाती है। उन्होंने 68 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की और 40 मुकाबलों में जीत दिलाई। उनकी अगुवाई में भारत ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रचा। इसके अलावा साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मुश्किल परिस्थितियों में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया।

विराट ने फिटनेस, आक्रामक रवैये और मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण पर खास ध्यान दिया। वहीं अश्विन और जडेजा की स्पिन जोड़ी ने घरेलू मैदानों पर भारत को लगभग अजेय बना दिया। साल 2022 में दक्षिण अफ्रीका दौरे के बाद विराट ने टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी, लेकिन उनका दौर आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे सुनहरे अध्यायों में गिना जाता है।

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