“मुंह छिपाकर जाओ” – रजाउल्लाह के स्वागत पर फूटा वसीम अकरम का गुस्सा, बोले- हम औसत दर्जे से ही खुश हो गए हैं
वसीम अकरम ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में टीम की हार के बाद फैंस के रवैये पर सवाल उठाए हैं।
अद्यतन - सितम्बर 21, 2026 5:23 अपराह्न

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में टीम की हार के बाद फैंस के रवैये पर सवाल उठाए हैं। पाकिस्तान को तीन मैचों की सीरीज में 0-3 से हार मिली। इसी सीरीज में डेब्यू करने वाले युवा खिलाड़ी रज़ाउल्लाह ने गेंद और बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया, जिसके बाद पाकिस्तान लौटने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। अकरम ने इसी स्वागत को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
पाकिस्तान के लिए यह टेस्ट सीरीज काफी निराशाजनक रही। पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने पारी और 103 रन से जीत दर्ज की। दूसरे मुकाबले में पाकिस्तान को 194 रन से हार मिली, जबकि तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने आठ विकेट से मुकाबला अपने नाम किया।
सीरीज के दौरान पाकिस्तान टीम में कई बदलाव भी हुए। शुरुआती दो मैचों के बाद सात खिलाड़ियों को बाहर किया गया और दो कोचों को भी टीम से हटाया गया। माइक हेसन ने बाद में कोच की जिम्मेदारी संभाली।
21 वर्षीय रज़ाउल्लाह ने 9 सितंबर को एजबेस्टन में अपना टेस्ट डेब्यू किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने से पहले उन्होंने सिर्फ आठ फर्स्ट क्लास मैच खेले थे। गेंदबाजी में उन्होंने इंग्लैंड की पहली पारी में 148 रन देकर चार विकेट लिए। खास बात यह रही कि उन्होंने अपने टेस्ट करियर की चौथी गेंद पर ही अनुभवी बल्लेबाज जो रूट को आउट कर दिया।
रज़ाउल्लाह ने पाकिस्तान की दूसरी पारी में 63 गेंदों पर 81 रन बनाए। उनकी पारी में नौ छक्के और चार चौके शामिल थे। उन्होंने सिर्फ 43 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने मोहम्मद अब्बास के साथ नौवें विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी की।
अकरम ने फैंस की सोच पर उठाए सवाल
रज़ाउल्लाह के पाकिस्तान लौटने पर करीब 5,000 लोगों ने उनका स्वागत किया। उनके गांव के लोग भी फूलों की माला और गुलदस्ते लेकर पहुंचे। अकरम ने इस पर कहा कि इंग्लैंड से बड़ी हार के बाद एक खिलाड़ी के व्यक्तिगत प्रदर्शन पर इतना बड़ा जश्न पाकिस्तान क्रिकेट की मानसिकता को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि “हमने औसत प्रदर्शन को स्वीकार कर लिया है।” अकरम के अनुसार, पाकिस्तान क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ कोच या प्रशासन में बदलाव काफी नहीं है। खिलाड़ियों और पूरे सिस्टम की सोच में भी बदलाव जरूरी है।