Virat Kohli और Neeraj Chopra के बीच यह 3 चीज है Common, करोड़ों में से 1-2 ही खिलाड़ी होते हैं ऐसे
इस आर्टिकल में हम उन 3 चीजों की बात कर रहे हैं, जो विराट कोहली और नीरज चोपड़ा में काफी समान है
अद्यतन - अगस्त 13, 2024 3:06 अपराह्न
2. कोहली-नीरज दोनों ने अपने-अपने खेल में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं

विराट कोहली ने भारतीय कप्तान बनने के बाद टीम के सभी खिलाड़ियों के बीच फिटनेस पर विशेष जोर देना शुरू कर दिया था। हेड स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच बासु शंकर के सहयोग से, दोनों ने मिलकर टीम इंडिया में फिटनेस के कल्चर को ही बदल दिया।
उन्होंने 2017 में यो-यो टेस्ट (रनिंग एरोबिक फिटनेस टेस्ट) शुरू किया, जिसमें सभी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने के लिए यह टेस्ट पास करना जरूरी था। परिणामस्वरूप, सबसे फिट खिलाड़ियों को टीम में जगह मिली और टीम को सभी प्रारूपों में अच्छा प्रदर्शन करने में सफलता मिली।
दिलचस्प बात यह है कि कोहली की कप्तानी में भारत पांच साल (2016-21) तक टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर रहा। हालांकि, टीम आईसीसी की कोई ट्रॉफी नहीं जीत सकी, लेकिन वे लगातार अच्छे प्रदर्शन की बदौलत अधिकांश मौकों पर नॉक आउट तक पहुंच गए। फिटनेस की वजह से कोहली के कप्तानी में टीम इंडिया अलग ही कमाल कर रही थी।
दूसरी ओर, नीरज चोपड़ा टोक्यो ओलंपिक में 21 साल बाद खेलों में भाग लेने वाले भारत के पहले भाला फेंक खिलाड़ी थे। 2000 के ओलंपिक में जगदीश बिश्नोई ने इस खेल में भाग लिया था। नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर भाला फेंककर इतिहास रच दिया और वे पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले एशियाई एथलीट बन गए थे।
हाल ही में संपन्न पेरिस ओलंपिक में 26 वर्षीय चोपड़ा ने 89.45 मीटर भाला फेंककर रजत पदक जीता और अपनी विरासत को और आगे बढ़ाया। जिस खेल को देश में कभी मान्यता नहीं मिलीं थी, अब चोपड़ा की प्रतिभा के कारण उसमें युवाओं और देश की रुचि बढ़ रही है।