जानें क्यों चैंपियंस ट्राॅफी विजेता टीम पहनती है व्हाइट जैकेट? पढ़ें इसके महत्व के बारे में
इस बार 19 फरवरी से शुरू हो रहा है चैंपियंस ट्राॅफी 2025 टूर्नामेंट
अद्यतन - फरवरी 4, 2025 5:36 अपराह्न

इस बार आईसीसी चैंपियंस ट्राॅफी 2025 की शुरुआत 19 फरवरी से हो रही है। पाकिस्तान की मेजबानी में इस बार 8 देशों के बीच खेले जाने वाला टूर्नामेंट पाकिस्तान और यूएई की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। पहला मैच पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच मुल्तान क्रिकेट स्टेडियम पर खेला जाएगा।
हाल में ही पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वसीम अकरम मल्टीनेशन टूर्नामेंट के विजेताओं के लिए व्हाइट जैकेट तैयार करवाते हुए नजर आए थे। इसका वीडियो भी आईसीसी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर शेयर किया था।
इस वीडियो के जारी होने के बाद फैंस के मन में सवाल आ रहा है कि आखिरी चैंपियंस ट्राॅफी विजेता टीम व्हाइट जैकेट या सफेद जैकेट क्यों पहनती है? तो आइए आपके इस सवाल का जबाव इस खबर के माध्यम से देने की कोशिश करते हैं:
इस वजह से टीमें पहनती हैं व्हाइट जैकेट
गौरतलब है कि साल 1998 से आईसीसी चैंपियंस ट्राॅफी खेली जा रही है, लेकिन विजेता टीम के खिलाड़ियों द्वारा व्हाइट जैकेट पहनने का चलन साल 2009 में आया। इस साल ऑस्ट्रेलिया ने साउथ अफ्रीका में टूर्नामेंट को जीता था, और इसके बाद टीम ने व्हाइट जैकेट पहनी थी। इसके बाद से प्रत्येक सीजन की विजेता टीम द्वारा इस परंपरा का अनुसरण किया जाने लगा।
खैर, चैंपियंस ट्राॅफी विजेता टीम को ट्राॅफी के अलावा खिलाड़ियों को व्हाइट जैकेट भी भेंट किए जाते हैं। खिलाड़ी जो ट्रॉफी जीतते हैं, वो तो बोर्ड के कार्यालय में रखी जाती है, लेकिन कोट हमेशा हर प्लेयर के पास रहता है। हाल में ही आईसीसी द्वारा जारी एक स्टेटमेंट के अनुसार खिलाड़ियों द्वारा पहने जाने वाली सफेद जैकेट एक सम्मान बिल्ला है, जो उनके अटूट दृढ़ संकल्प और महानता को दर्शाता है।
हर मैच आईसीसी के सबसे बड़े दांव वाले इवेंट प्रारूप में गिना जाता है, जहां टीमें न केवल चैंपियंस ट्रॉफी के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं, बल्कि प्रतिष्ठित सफेद जैकेट के लिए भी प्रतिस्पर्धा करती हैं, जो उनकी महानता और दृढ़ संकल्प के अंतिम उपाय का प्रतीक है। सफेद जैकेट सामरिक प्रतिभा और पीढ़ियों को प्रेरित करने वाली विरासत की निरंतर खोज का प्रतीक हैं।
सफेद जैकेट जीतना जीत के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने की यात्रा का प्रतीक है। चूंकि क्रिकेट को ‘जेंटलमेन्स गेम’ कहा जाता है और सफेद रंग शुद्धता, ईमानदारी और निष्पक्षता का प्रतीक माना जाता है, जिस वजह से इसे खिलाड़ियों को भेंट किया जाता है।