3 बड़े कारण, क्यों ऋषभ पंत वनडे क्रिकेट में एक और मौका पाने के हैं हकदार

3 बड़े कारण, क्यों ऋषभ पंत वनडे क्रिकेट में एक और मौका पाने के हैं हकदार

तीन मुख्य कारण जिनकी वजह से भारतीय चयनकर्ताओं को वनडे में पंत को लंबे समय तक खेलने का मौका देना चाहिए।

3 reasons why Rishabh Pant deserves another chance in ODIs (image via getty)
3 reasons why Rishabh Pant deserves another chance in ODIs (image via getty)

जब टीम इंडिया 2027 के वनडे वर्ल्ड कप के लिए अपनी टैक्टिस बना रही है, तो 50-ओवर के फॉर्मेट में ऋषभ पंत की भूमिका को लेकर बहस फिर से शुरू हो गई है। चोटों और टीम कॉम्बिनेशन की वजह से लंबे समय तक वनडे टीम से दूर रहने के बावजूद, यह शानदार विकेटकीपर-बल्लेबाज टीम में वापसी का मजबूत दावा पेश करता है।

पंत ने 31 वनडे मैचों में 106.21 के जबरदस्त स्ट्राइक रेट से 871 रन बनाए हैं, जिसमें इंग्लैंड में खेली गई मैच जिताने वाली 125* रनों की पारी भी शामिल है। ऋषभ पंत ने 17 जुलाई, 2022 को मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड के खिलाफ 113 गेंदों पर नाबाद 125 रन बनाकर अपना पहला वनडे शतक लगाया था।

तीन मुख्य कारण जिनकी वजह से भारतीय चयनकर्ताओं को वनडे में पंत को लंबे समय तक खेलने का मौका देना चाहिए

1. बाएं हाथ के बल्लेबाज से मिडिल-ऑर्डर में जरूरी बैलेंस

भारत का वनडे बैटिंग ऑर्डर ज्यादातर दाएं हाथ के बल्लेबाजों पर निर्भर है। अगर टॉप पर यशस्वी जायसवाल नहीं हों, तो विरोधी टीम के गेंदबाज लगातार पांच दाएं हाथ के बल्लेबाजों के सामने एक ही तरह की लाइन-लेंथ पर गेंदबाजी कर सकते हैं। हालांकि अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे ऑलराउंडर बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, लेकिन पंत मिडिल-ऑर्डर में एक असली स्पेशलिस्ट बल्लेबाज का विकल्प देते हैं, जो विरोधी टीम की स्पिन की योजनाओं और मैच-अप की टैक्टिस को बिगाड़ सकते हैं।

2. स्टंप्स के पीछे और सामने दोहरी भूमिका निभाने की काबिलियत

पंत ने 50-ओवर के क्रिकेट में 27 कैच और एक स्टंपिंग करके खुद को एक भरोसेमंद विकेटकीपर साबित किया है। टीम में उनके होने से न सिर्फ विकेट के पीछे एक बेहतरीन बैकअप मिलता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर केएल राहुल सिर्फ एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज के तौर पर भी खेल सकते हैं। यह फ्लेक्सिबिलिटी वर्कलोड मैनेजमेंट में मदद करता है और लंबे मल्टी-टीम टूर्नामेंट में बैटिंग की डेप्थ को मजबूत करता है।

3. जबरदस्त फिनिशिंग और मुश्किल हालात में बेहतर खेल

सिर्फ 31 मैचों में 91 चौके और 26 छक्के लगाने वाले पंत, डेथ ओवर्स में टीम को जबरदस्त ताकत देते हैं। सबसे अहम बात यह है कि उनका खेल सिर्फ एक तरह का नहीं है। मुश्किल मैचों में उन्होंने दिखाया है कि अगर टॉप-ऑर्डर जल्दी आउट हो जाए, तो वे पारी को संभाल सकते हैं और फिर तेजी से रन बना सकते हैं।

28 साल की उम्र में पंत अपने करियर के सबसे बेहतरीन दौर में हैं। अभी उनके मैच जिताने वाले हुनर ​​पर भरोसा करने से भारत को 2027 वर्ल्ड कप के लिए एक भरोसेमंद और आक्रामक ‘X-फैक्टर’ खिलाड़ी मिलेगा।

close whatsapp