‘मैंने अब जीवन को बेहतर समझा है..’- WTC फाइनल हार के बाद ट्वीट को लेकर अश्विन ने किया बड़ा खुलासा
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में भारत को 209 रनों से हार का सामना करना पड़ा।
अद्यतन - Jun 20, 2023 12:58 pm

रविचंद्रन अश्विन इस वक्त Tamil Nadu Premier League 2023 में डिंडीगुल ड्रैगन्स की कप्तानी करते हुए नजर आ रहे हैं। अश्विन की कप्तानी में लगातार दो जीत हासिल कर डिंडीगुल ड्रैगन्स इस वक्त पॉइंट्स टेबल में पहले पायदान पर विराजमान है। टीम इंडिया को हाल ही में आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है।
ऑस्ट्रेलिया द्वारा निर्धारित 444 रनों का पीछा करते हुए टीम इंडिया 234 रनों पर ऑलआउट हो गई, और ऑस्ट्रेलिया ने 209 रनों से जीत दर्ज की। नंबर-1 टेस्ट गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को फाइनल के प्लेइंग 11 से ड्रॉप कर दिया गया था। दिग्गज खिलाड़ियों और फैंस ने मैनेजमेंट के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की थी। ऑस्ट्रेलिया के जीत के बाद अश्विन ने ट्वीटर पर टीम को बधाई भी दे थी। जिसे लेकर अश्विन ने हाल ही में बड़ा बयान दिया हैं।
मुझे क्लोजर की आवश्यकता है- अश्विन
भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचाने में अश्विन ने बड़ी भूमिका निभाई है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ WTC फाइनल से पहले हुए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में अश्विन ने रवींद्र जडेजा के साथ संयुक्त रूप से प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब भी जीता था।
हाल ही में रविचंद्रन अश्विन ने इंडियन एक्सप्रेस पर बात करते हुए कहा, ‘जिस क्षण फाइनल समाप्त हुआ, मैंने एक ट्वीट किया क्योंकि मुझे एहसास हुआ कि मुझे क्लोजर की आवश्यकता है। जिस क्षण मुझे क्लोजर मिलता है मैं आगे बढ़ सकता हूं। घूमने का समय नहीं है, मैंने अब जीवन को बहुत बेहतर समझा है।’
खेल अभी भी मेरे नियंत्रण में हैं- अश्विन
रविचंद्रन अश्विन ने आगे बात करते हुए बताया कि, किस प्रकार से क्रिकेट उनके परिवार पर भी असर डालता है। ‘जितना अधिक मैं इसे देखता हूं मेरे परिवार पर जिस तरह का आघात लगता है वह अविश्वसनीय है। मेरे पिता को दिल की समस्या और अन्य सम्याएं हैं। हर एक खेल हर एक दिन कुछ न कुछ होता है।’
अश्विन ने आगे कहा, ‘यह तनावग्रस्त है। मेरे लिए बाहर जाकर खेलना बहुत आसान है क्योंकि यह अभी भी मेरे नियंत्रण में हैं। लेकिन मेरे पिता के लिए यह नहीं है, और मैं जो करता हूं उससे दोगुना हो जाता है। इसलिए इसे पीछे से देखते हुए बाहर हर कोई अप्रासंगिक है।’