Ranji Trophy: ईशान किशन का तूफानी शतक, बोले – अब समझ आया अनुभव और धैर्य ही असली ताकत!
झारखंड के कप्तान ने तमिलनाडु के खिलाफ नाबाद 125 रन बनाए, कहा स्थिति के अनुसार खेलना ही असली परिपक्वता है।
अद्यतन - अक्टूबर 16, 2025 12:23 अपराह्न

झारखंड के कप्तान ईशान किशन इस समय पूरी तरह वर्तमान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और जिस भी स्तर पर खेल रहे हैं, हर मौके का आनंद लेना चाहते हैं। 2025–26 की रणजी ट्रॉफी में झारखंड की अगुवाई करते हुए किशन ने शानदार शुरुआत की।
तमिलनाडु के खिलाफ कोयंबटूर की हरी पिच पर टीम के शुरुआती बल्लेबाजो के जल्दी आउट हो जाने के बाद उन्होंने धैर्यपूर्ण शतक नाबाद 125 रन, 183 गेंदों पर लगाकर टीम को मुश्किल स्थिति से उबारा। उनकी इस पारी की बदौलत झारखंड ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक 307/6 का मजबूत स्कोर बना लिया।
अनुभव ने सिखाया समझदारी से खेलना
किशन ने साहिल राज के साथ सातवें विकेट के लिए नाबाद 150 रनों की साझेदारी की। इस दौरान उन्होंने अपने स्वभाविक आक्रामक अंदाज पर नियंत्रण रखते हुए संयम दिखाया। उन्होंने पारी में सिर्फ दो छक्के लगाए, जो उनके परिपक्व खेल और स्थिति की समझ को दर्शाता है।
ईशान ने कहा, इस स्तर पर आपको बहुत समझदारी से खेलना पड़ता है। रणजी ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिता का महत्व समझना जरूरी है। बड़े टीमों के खिलाफ ऐसे मैच ही आपके खेल को निखारते हैं। ईशान किशन का यह बयान ईएसपीएनक्रिकइन्फो (ESPNcricinfo) से बातचीत के दौरान बताया था।
उन्होंने आगे कहा, करियर की शुरुआत में आप कई गलतियां करते हैं, लेकिन अनुभव से सीखते हैं। जब आप मैदान में होते हैं तभी समझ आता है कि कब और कैसे खेल बदलना है। मैं बाएं हाथ के स्पिनर के खिलाफ बड़ा शॉट खेलना चाहता था, लेकिन जब छह विकेट गिर चुके थे, तो समझ आया कि संभलकर खेलना जरूरी है।
किशन ने अनुभव के महत्व पर जोर देते हुए कहा, जैसे जैसे आप ज्यादा मैच खेलते हैं, आपको समझ आता है कि कई बार सिंगल्स छक्कों से ज्यादा अहम होते हैं। लंबी साझेदारी से विपक्षी गेंदबाज थक जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस सीजन में उन्होंने खुद के लिए कोई लक्ष्य नहीं रखा है। जब भी मैं लक्ष्य लेकर मैदान में उतरा हूं, उल्टा ही हुआ है। अब बस इतना तय किया है कि क्रीज पर टिके रहना है, रन अपने आप मिल जाएंगे।