‘मुझे ज्यादा आजादी नहीं मिली’ सचिन तेंदुलकर ने अपनी कप्तानी के दिनों में BCCI के दखल पर दिया बड़ा बयान
आइए आपको इस खबर के बारे में विस्तार से बताते हैं
अद्यतन - नवम्बर 4, 2026 12:34 अपराह्न

पूर्व भारतीय क्रिकेटर व क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने हाल में ही अपनी कप्तानी के दिनों को याद करते हुए बड़ा बयान दिया है। सचिन ने बताया कैसे बीसीसीआई उस समय कप्तानी में दखल देती थी, जिस वजह से उन्हें कभी आजादी महसूस नहीं हुई।
गौरतलब है कि सचिन तेंदुलकर ने 15 नवंबर 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू किया और 16 नवंबर, 2013 को वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी मैच खेला था। अपने 24 साल के इंटरनेशनल क्रिकेट करियर के दौरान सचिन ने बहुत ही कम समय के लिए भारतीय टीम की कमान संभाली थी।
जब बीसीसीआई देती थी कप्तानी में दखल
गौरतलब है कि 10 अगस्त 1996 को, 23 साल और 109 दिन की उम्र में, तेंदुलकर को मोहम्मद अजहरुद्दीन की जगह भारत का कप्तान बनाया गया। इस भूमिका में उनके पहली सीरीज पाकिस्तान के खिलाफ सहारा कप सीरीज और श्रीलंका के साथ सीमित ओवरों वाली सिंगर कप प्रतियोगिता शामिल थी। टीम के खराब प्रदर्शन के कारण 1997 में उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया, फिर 1998 में वे दोबारा कप्तान बने, लेकिन 2000 में उन्होंने टीम के लगातार लचर प्रदर्शन के चलते कप्तानी छोड़ दी थी। तेंदुलकर का दूसरा कार्यकाल भी काफी हद तक असफल रहा। कप्तान के तौर पर उनका जीत प्रतिशत टेस्ट में 16 प्रतिशत और वनडे में 31 प्रतिशत रहा।
हाल में ही रैडिट पर दिए एक बयान में सचिन ने कहा “कप्तान के तौर पर टीम का नेतृत्व करना बहुत बड़े सम्मान की बात थी। हालांकि, मुझे हमेशा अपनी टीम पूरी तरह से खुद चुनने की आजादी नहीं थी। 1990 के दशक की तुलना में आज का BCCI कहीं ज्यादा पेशेवर संगठन है। उस दौर में भारतीय क्रिकेट एक बहुत ही बुरे दौर से भी गुजरा था।”
तो वहीं, जब उनसे भारतीय क्रिकेट टीम पसंदीदा कप्तानों के बारे में पूछा गया तो सचिन ने पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली और एमएस धोनी का नाम लिया। उन्होंने यह ये दोनों मेरी कप्तानों की लिस्ट में टाॅप पर होंगे।
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