प्रमुख चिकित्सा अधिकारी अभिजीत साल्वी के इस्तीफे से BCCI फंसी मुश्किल में - क्रिकट्रैकर हिंदी

प्रमुख चिकित्सा अधिकारी अभिजीत साल्वी के इस्तीफे से BCCI फंसी मुश्किल में

विजय मर्चेंट ट्रॉफी का आगाज 9 जनवरी से होना है।

Sourav Ganguly and Jay Shah
Sourav Ganguly and Jay Shah. (Photo Source: Twitter)

बीसीसीआई के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिजीत साल्वी ने कथित तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके ऊपर खिलाड़ियों के उम्र परीक्षण और सत्यापन की जिम्मेदारी थी और अब उनकी गैरमौजूदगी में अगले महीने होने वाले राष्ट्रीय अंडर-16 क्रिकेट टूर्नामेंट विजय मर्चेंट ट्रॉफी में उम्र का धोखधड़ी करने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।

बीसीसीआई ने साल्वी के इस्तीफे की खबर को अभी सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि उन्होंने भारत और न्यूजीलैंड के बीच सात दिसंबर को खत्म हुए दूसरे टेस्ट के बाद यह पद छोड़ा था। विजय मर्चेंट ट्रॉफी 9 जनवरी से शुरू होने वाली है जिसमें देश भर के अंडर-16 क्रिकेटर भाग लेंगे। कुल 36 टीमें इसे ट्रॉफी के लिए लड़ती हैं और अभिजीत साल्वी टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों की उम्र को सत्यापित करने के लिए प्रभारी थे।

उनके इस्तीफे का समय महत्वपूर्ण है क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने में केवल एक महीने से भी कम समय बचा है। ईएसपीएन क्रिकइंफो की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल्वी ने व्यक्तिगत कारणों से इस पद को छोड़ दिया है और खबर को सार्वजनिक नहीं करने के अलावा, बीसीसीआई ने अभी तक उनके प्रतिस्थापन का विज्ञापन भी नहीं जारी किया है। अब ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अगले महीने होने वाले राष्ट्रीय अंडर-16 टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का उम्र परीक्षण और सत्यापन कौन करेगा?

अभिजीत साल्वी की क्या भूमिका थी?

अभिजीत साल्वी आयु सत्यापन प्रक्रिया के प्रभारी थे क्योंकि बीसीसीआई का उद्देश्य उम्र के धोखाधड़ी को खत्म करना था। भारत के वर्तमान कोच और युवा खिलाड़ियों के साथ लंबा समय बिता चुके राहुल द्रविड़ ने उम्र-सीमा में होने वाली धांधली को भारतीय क्रिकेट के लिए एक जहरीली प्रक्रिया कहा था और इसे फिक्सिंग के बराबर बताया था।

जहां तक ​​साल्वी का सवाल है, तो उन्हें ‘बोन डेंसिटी टेस्ट’ के लिए जाना जाता है, जिससे कलाइयों के हड्डी से किसी के भी असल उम्र का पता लग सकता है। उम्र को सत्यापित करने के लिए कोई चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं होने के कारण, इस टूर्नामेंट में उम्र की धांधली करने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़ सकती है और योग्य खिलाड़ी भी प्रतियोगिता से बाहर हो सकते हैं। इससे भविष्य में उनके अंडर-19 खेलने पर भी खतरा मंडरा सकता है।