“2013 ने उनके करियर को बदल दिया…”,- रोहित शर्मा की क्रिकेटिंग जर्नी को लेकर आकाश चोपड़ा का बयान
रोहित शर्मा के करियर का सबसे अहम पल वह था, जब वे 2013 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में शिखर धवन के साथ ओपनिंग कर रहे थे- आकाश चोपड़ा
अद्यतन - Sep 14, 2024 9:51 pm

रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने इसी साल जून में टी20 वर्ल्ड कप 2024 के खिताब पर कब्जा किया। रोहित शर्मा को 2021 में व्हाइट-बॉल क्रिकेट का कप्तान नियुक्त किया गया था, जिसके बाद 2022 में वह सभी फॉर्मेट के कप्तान बने। हिटमैन के नेतृत्व में टीम वनडे वर्ल्ड कप 2023 और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भी पहुंची थी, लेकिन टीम ट्रॉफी नहीं जीत पाई थी।
रोहित शर्मा ने 2007 में भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था, लेकिन वह शुरुआत में नेशनल टीम में रेगुलर नहीं रहे। उन्हें कई मौके दिए गए, लेकिन कंसिस्टेंसी की कमी के कारण वह परमानेंट टीम इंडिया में जगह बनाने में असफल रहे, वह 2011 वनडे वर्ल्ड कप टीम से भी बाहर थे। इस बीच, हाल ही में क्रिकेट कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने रोहित शर्मा की क्रिकेटिंग जर्नी को लेकर बड़ा बयान दिया है।
रोहित शर्मा ने 2013 के बाद अपने करियर के सुनहरे दौर में प्रवेश किया- आकाश चोपड़ा
रोहित शर्मा की क्रिकेटिंग जर्नी को याद करते हुए आकाश चोपड़ा ने कहा कि 2011 वनडे वर्ल्ड कप में न खेल पाना उन्हें जरूर दुख पहुंचाएगा। क्रिकेट कमेंटेटर ने यह भी बताया कि वो साल 2013 था, जिसने रोहित का करियर हमेशा के लिए बदल दिया। आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए बताया,
रोहित शर्मा के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरूआती साल उतार-चढ़ाव भरे रहे। उनका टैलेंट साफ झलक रहा था, लेकिन वे अपनी शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पाए। 2011 में रोहित को बड़ा झटका लगा, जब उन्हें आईसीसी वर्ल्ड कप टीम से बाहर कर दिया गया। रोहित शर्मा के करियर का सबसे अहम पल वह था, जब वे 2013 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में शिखर धवन के साथ ओपनिंग कर रहे थे।
क्रिकेट कमेंटेटर ने आगे कहा,
ओपनिंग ने उन्हें अपना स्वाभाविक खेल खेलने की आजादी दी और रोहित का करियर वहीं से ऊपर उठना शुरू हुआ। रोहित ने 2013 के बाद अपने करियर के सुनहरे दौर में प्रवेश किया। रोहित लिमिटेड ओवरों के क्रिकेट में सबसे शानदार बल्लेबाज बन गए। उन्हें लंबी पारी खेलने और तेजी से रन बनाने की उनकी क्षमता के लिए पहचाना जाता था। रोहित की पारी के दौरान गियर बदलने की क्षमता लेजेंडरी बन गई है।