जब क्रिकेटर मुश्ताक अली ने भुट्टो की आग्रह को ठुकरा दिया - क्रिकट्रैकर हिंदी

जब क्रिकेटर मुश्ताक अली ने भुट्टो की आग्रह को ठुकरा दिया

Mushtaq Ali
Mushtaq Ali comes out to bat. (Photo Source: Navbharat Times)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो भारतीय क्रिकेटर मुश्ताक अली के कायल थे। भुट्टो, मुश्ताक अली से इतने मरीद हो गये थे कि उन्होंने एक बार तो मुश्ताक अली को पाकिस्तान की नागरिका का प्रस्ताव रख दिया। लेकिन मुश्ताक अली ने भुट्टों की आग्रह को यह कहते हुये ठुकरा दिया कि उन्हें भारत में ही रहता है। भारत मेरा घर है, और यहां हमे बहुत कुछ मिला है। यह खुलासा उनके बेटे गुलरेज अली ने किया है.
मुश्ताक अली के बेटे गुलरेज की माने तो मुश्ताक अली को दो बार पाकिस्तान की नागरिगता का प्रस्ताव मिला। लेकिन उन्होंने दोनों बार आग्रह पूर्वक ठुकरा दिया। उन्होंने बताया कि पहली बार देष के बंटवारें के दौरान 1947-48 में भी पाकिस्तान की नागरिका का प्रस्ताव मिला था। उसके बाद 70 के दषक में जब मुष्ताक अली तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने षिमला गये थे, तक भी उन्हें पाकिस्तान का नागरिकता लेने का आग्रह किया गया। इस बार भी मुष्ताक ने आग्रह को अस्वीकार कर दिया। मुश्ताक ने कहा कि भारत से हमे बहुत कुछ मिला है। और यहीं पर पूरी जिंदगी गुजारना चाहता हूं.
1914 में मध्य प्रदेष में जन्में मुश्ताक अली का नाम भारतीय क्रिकेटरों में शुमार है। उन्होंने कई बार अपनी को संकट से उबारा है। उन्होंने 1934-52 तक देष का प्रतिनिधित्व किया, और 11 टेस्ट मैच खेले थे। मुश्ताक अली ने 1936 में ओल्ड ट्रैफेड मैदान में खेले गये टेस्ट मैच में विजय मर्चेट के साथ 203 रनों की साझेदारी की, अपने टीम को मुश्किल से उबारा था। जिसे मुश्ताक अली ने 112 रनों की पारी खेली थी। हालांकि मुश्ताक ने जुल्फीकार अली भुट्टों के सम्मान में उन्होंने अपने पोते और गुलरेज के बेटे का नाम जुल्फी रखा था.
मुश्ताक अली के बाद उनके बेटे गुलरेज अली क्रिकेट में कदम रखा। गुलरेज अली भारतीय ए टीम में खेल चुके हैं। उन्होंने 90 के दषक में पाकिस्तान का दौरा भी किया था। दो साल पहले ही उन्होंने क्रिकेट के प्रथम श्रेणी से संन्यास ले लिया है। अब वे मध्य प्रदेष क्रिकेट टीम के कोच हैं। और टी-20 की तैयारी में लगे हुये हैं। उनका मानना है कि उनका पूरा परिवार भारत में ही रहना चाहता है। क्योंकि उन्हें भारत में जो सम्मान मिला है। वह कहीं और जगह नहीं मिल सकता है.