गुजरात टाइटंस टीम के मुख्य कोच आशीष नेहरा की तारीफ करते हुए टीम के बल्लेबाजी कोच गैरी कर्स्टन ने अब कही यह बात
2011 वनडे वर्ल्ड कप में जब आशीष नेहरा भारतीय टीम की ओर से एक खिलाड़ी के तौर पर खेल रहे थे तब गैरी कर्स्टन मुख्य कोच की भूमिका में थे।
अद्यतन - Jun 2, 2022 4:36 pm

धमाकेदार सीजन के बाद गुजरात टाइटंस (GT) टीम के बल्लेबाजी कोच और संरक्षक गैरी कर्स्टन ने टीम के मुख्य कोच आशीष नेहरा की प्रशंसा की है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2022 के सीजन में एक नई फ्रेंचाइजी के तौर पर शामिल की गई गुजरात टाइटंस की टीम का प्रदर्शन शुरू से लेकर फाइनल मुकाबले तक काफी शानदार देखने को मिला। जिसमें टीम को पूरे टूर्नामेंट के दौरान सिर्फ 4 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा।
बता दें, 2011 वनडे वर्ल्ड कप में जब आशीष नेहरा भारतीय टीम की ओर से एक खिलाड़ी के तौर पर खेल रहे थे तब इस टीम के मुख्य कोच गैरी कर्स्टन ही थे। यही नहीं IPL 2018 में भी दोनों ने इससे पहले रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की कोचिंग कमान संभाली है।
हालांकि इस सीजन में दोनों के पद को उल्टा कर दिया गया था। टीम के मुख्य कोच की कमान आशीष नेहरा को मिली थी वहीं सहायक कोच का पद गैरी कर्स्टन को मिला।
अगर रणनीतिक रूप की बात की जाए तो आशीष नेहरा IPL के सर्वश्रेष्ठ कोचों में से एक हैं: गैरी कर्स्टन
क्रिकबज में गैरी कर्स्टन ने आशीष नेहरा की तारीफ करते हुए कहा कि, आशीष मेरा बहुत करीबी दोस्त है और हमने काफी समय एक साथ बिताया है। एक खिलाड़ी के तौर पर मैंने उनके इस खेल को समझने के तरीके को काफी करीब से समझा। वो दिल से कोचिंग देते हैं और हमेशा ये सोचते रहते हैं कि कैसे अपने खिलाड़ियों की मदद कर सकें।
उन्होंने आगे कहा कि, आशीष नेहरा को स्पॉटलाइट में रहना पसंद नहीं है। अगर रणनीतिक रूप की बात की जाए तो वो IPL के सर्वश्रेष्ठ कोचों में से एक हैं और हमेशा अपने खिलाड़ियों से बात करते रहते हैं कि बेहतर प्रदर्शन कैसे किया जाए।
गैरी कर्स्टन जो तमाम अंतरराष्ट्रीय टीमों और तमाम फ्रेंचाइजियों के कोचिंग स्टाफ में शामिल रहे हैं। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने ज्यादातर समय कोचिंग को ही दिया है। इसको लेकर कर्स्टन ने कहा कि, मेरे लिए यह बहुत ही अच्छा अनुभव था कि मैं मुख्य कोच के पद में नहीं रहा।
सबसे पहली बात मुझे काफी अच्छा लगा और दूसरी बात मुझे भरोसा हो गया है कि IPL में आपको एक तगड़े भारतीय कोच की बेहद जरूरत होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह एक भारतीय टूर्नामेंट है और इसमें 85% खिलाड़ियों की पहली भाषा हिंदी है। इस 2 महीने के टूर्नामेंट में भारतीय कोच और भारतीय कप्तान होना बेहद जरूरी है।
‘हमें लग गया था कि हमारी टीम इस टूर्नामेंट में सबसे कम छक्के मारेंगी’: गैरी कर्स्टन
टीम में हार्दिक पांड्या, डेविड मिलर और राहुल तेवतिया जैसे ताबड़तोड़ बल्लेबाजों के बावजूद गुजरात टीम ने इस टूर्नामेंट में सभी फ्रेंचाइजियों को मिलाकर सबसे कम छक्के (79) लगाए थे। हालांकि सबसे ज्यादा चौके (250) जड़ने के मामले में वह दूसरे स्थान पर रहे।
इसको लेकर गैरी कर्स्टन ने कहा कि, हमें मालूम चल गया था कि हम इस टूर्नामेंट में सबसे कम छक्के लगाने वाली टीम होंगे। हमें मालूम है कि हमने इस पूरे टूर्नामेंट में सबसे कम डॉट गेंदें खेली हैं। गेंदबाज़ी के हिसाब से बात की जाए तो हम चाहते थे कि हम पावरप्ले में और आखिरी ओवरों में बेहतरीन गेंदबाजी करें और वैसा ही हुआ।