आखिर क्यों वीरेंद्र सहवाग को कहना पड़ा कि वह नहीं चाहते कि कोई अनिल कुंबले को लेकर सवाल करे - क्रिकट्रैकर हिंदी

आखिर क्यों वीरेंद्र सहवाग को कहना पड़ा कि वह नहीं चाहते कि कोई अनिल कुंबले को लेकर सवाल करे

मैं टेस्ट क्रिकेट में 10000 रन से ज्यादा ना बना पाता अगर कुंबले भाई ने मेरा साथ ना दिया होता तो: वीरेंद्र सहवाग

Virender Sehwag and Anil Kumble
Virender Sehwag and Anil Kumble. (Photo by DIBYANGSHU SARKAR/AFP/Getty Images)

भारतीय टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने हाल ही में बताया है कि, जैसे सभी बल्लेबाज कभी ना कभी अपने बुरे फॉर्म से जूझते हैं वो भी जूझे हैं लेकिन इसके बावजूद अनिल कुंबले ने उनका साथ दिया है और उन्हें लगातार मौके दिए। बता दें अनिल कुंबले 2007 में भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान थे।

सहवाग को 2007 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दो टेस्ट मुकाबलों के लिए टीम में शामिल नहीं किया जा रहा था लेकिन अनिल कुंबले ने उनका समर्थन किया है और उनको भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया। मुकाबले से पहले पर्थ में हुए वार्म अप मैच में सहवाग ने एसीटी इन्विटेशनल XI के खिलाफ शतक जड़ा और प्लेइंग XI में अपनी जगह बनाई।

सहवाग ने पर्थ में तीसरे टेस्ट मुकाबले में बेहतरीन शुरुआत दिलाई और सीरीज के आखिरी टेस्ट मुकाबले में 63 और 151 रन बनाए जो एडिलेड में खेला गया था। इसके बाद उनकी टेस्ट टीम में जगह पूरी तरह से पक्की हो गई। उन्होंने 104 टेस्ट मुकाबलों में 49.3 के औसत से 8586 रन बनाए हैं। यही नहीं 2007 के बाद उन्होंने एक और तिहरा शतक भी जड़ा था।

मैं अनिल भाई का धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे दूसरा मौका दिया: वीरेंद्र सहवाग

वीरेंद्र सहवाग की मानें तो यदि उनको साल 2007 के समय टेस्ट क्रिकेट टीम से बाहर नहीं किया जाता वह 10,000 टेस्ट रन के क्लब में जरूर शामिल होते। उनकी माने तो एडिलेड में जो पारी उन्होंने खेली थी वो सबसे महत्वपूर्ण थी क्योंकि उनको कुंबले के उन पर भरोसा जताया था उसको सबके सामने रखना था। उनकी माने तो अगर कुंबले ने ऑस्ट्रेलिया टेस्ट में उन पर भरोसा ना जताया होता तो वो आज टेस्ट क्रिकेट में इतना अच्छा प्रदर्शन न कर पाते।

सहवाग ने स्पोर्ट्स18 के ‘होम ऑफ हीरोज’ शो में कहा कि मुझे एकदम से पता चला था कि मैं टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं हूं। मुझे बहुत बुरा लगा था। क्योंकि इससे मैं 10,000 टेस्ट रन के क्लब में शामिल नहीं हो सका।

उन्होंने कहा कि वो 60 रन मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण स्कोर था। मुझे सिर्फ अनिल भाई का विश्वास जीतना था जो उन्होंने मुझ पर दिखाया था। मैं नहीं चाहता था कि कोई उन पर सवाल उठाए कि मुझे ऑस्ट्रेलिया टेस्ट के लिए क्यों टीम में शामिल किया। मैंने आराम से इस मुकाबले में रन बनाए और बिना किसी डर के खेला।

मैंने पहले गांगुली से यह सुना था और उसके बाद कुंबले से सुना कि, जब तक मैं टेस्ट टीम का कप्तान हूं तब तक तुम्हें कोई भी टीम से नहीं हटा सकता। ये एक खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी बात है कि अपने कप्तान का विश्वास जीतना और प्लेइंग XI में शामिल होना।

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