जिम-फिट से ज्यादा ‘मैच-फिट’ होना जरूरी: सुनील गावस्कर
गावस्कर ने खिलाड़ियों के रोजाना जिम में ज्यादा समय बिताने की जरूरत पर भी सवाल उठाया।
अद्यतन - अगस्त 16, 2026 5:08 अपराह्न

भारतीय क्रिकेट टीम इन दिनों खिलाड़ियों की चोटों की समस्या से परेशान है। जसप्रीत बुमराह, साई सुदर्शन, वॉशिंगटन सुंदर, हार्दिक पांड्या, नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा जैसे कई खिलाड़ी चोट से प्रभावित हैं। लगातार बढ़ रही चोटों ने टीम के फिटनेस सिस्टम और खिलाड़ियों की ट्रेनिंग को लेकर बहस शुरू कर दी है।
इसी बीच भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भारतीय खिलाड़ियों को बार-बार एक जैसी चोटें क्यों लग रही हैं और क्या मौजूदा ट्रेनिंग सिस्टम में बदलाव की जरूरत है।
गावस्कर ने कहा कि जसप्रीत बुमराह की चोट अलग है, लेकिन भारतीय टीम के कई खिलाड़ियों को बार-बार हैमस्ट्रिंग की समस्या हो रही है। उनके मुताबिक, इस तरह की चोटों को केवल फिजियो की जिम्मेदारी मानने के बजाय ट्रेनिंग और तैयारी के तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने खिलाड़ियों की ट्रेनिंग में बायोमैकेनिक्स से जुड़े कुछ नियमों पर भी सवाल उठाए। गावस्कर के अनुसार, नेट्स में गेंदबाजों को सीमित गेंदें फेंकने की अनुमति देना हमेशा फायदेमंद नहीं हो सकता। उनका मानना है कि मैच में गेंदबाजों को जितना काम करना पड़ता है, उसकी तैयारी भी उसी स्तर की होनी चाहिए।
गावस्कर ने खिलाड़ियों के रोजाना जिम में ज्यादा समय बिताने की जरूरत पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि क्रिकेटर के लिए जिम में फिट दिखने से ज्यादा जरूरी मैदान पर मैच के लिए पूरी तरह तैयार रहना है।
उन्होंने कहा कि लगातार हो रही चोटों के कारणों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। टीम को यह समझने की जरूरत है कि खिलाड़ी बार-बार चोटिल क्यों हो रहे हैं और इसके पीछे ट्रेनिंग, वर्कलोड या अन्य कारणों की क्या भूमिका है।
वर्ल्ड कप से पहले बढ़ी चिंता
भारतीय कप्तान शुभमन गिल भी खिलाड़ियों की चोटों की संख्या पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि बार-बार प्लेइंग इलेवन बदलना टीम के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
आगामी वर्ल्ड कप में खिलाड़ियों को कई मुकाबले खेलने होंगे। ऐसे में गावस्कर की टिप्पणी ने भारतीय टीम के फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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