‘मां की वजह से रोहित शर्मा ने चुनी थी 45 नंबर की जर्सी’ रोहित शर्मा खुद शेयर किया दिलचस्प किस्सा
आइए आपको इस दिलचस्प किस्से के बारे में जानकारी देते हैं
अद्यतन - अक्टूबर 31, 2026 1:06 अपराह्न

Rohit Sharma Reveals Secret Behind His Jersey Number 45: क्रिकेट जगत में 45 नंबर की जर्सी रोहित शर्मा के नाम का पर्याय बन चुकी है। अगर आप किसी भी क्रिकेट फैन से 45 नंबर की जर्सी नंबर पहनकर क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी का नाम पूछेंगे, तो वह लपक के हिटमैन रोहित शर्मा का नाम लेगा।
दूसरी ओर, हाल में ही रोहित शर्मा ने खुद 45 नंबर की जर्सी को लेकर एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। रोहित ने बताया कि कैसे इस नंबर को लेने में उनकी मां पूर्णिमा शर्मा ने कैसे मदद की। रोहित ने यह मजेदार जानकारी सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले गेमिंग शो ‘फैमिली फुल हाउस’ के एक एपिसोड के दौरान दी।
इस वजह से मिली थी रोहित को 45 नंबर की जर्सी
इस शो के दौरान अभिनेता राहुल लोहानी ने रोहित से उनके आसानी से पहचाने जाने वाले नंबर 45 के महत्व के बारे में एक सवाल पूछा, जिस पर क्रिकेटर ने उस सफर के बारे में बताया जो इस खास चुनाव तक ले गया। इस शो में रोहित ने कहा:
“इसका बड़ा सिंपल सा लॉजिक था, मैंने जब पहली बार जर्सी में क्रिकेट खेला, क्योंकि आप जर्सी पहनते हो तो आपको नंबर चुनना पड़ता है। तो लोगों ने सब नंबर चूज कर लिया था, नंबर 5, नंबर 8, नंबर 9। मुझे सिंगल डिजिट नंबर चाहिए था, लेकिन सब लोगों ने नंबर चूज कर लिया था। तो मेरे पास बचा नंबर 19, क्योंकि वो 19 नंबर मुझे बस ऐसे ही अच्छा लग रहा था। तो मैंने 19 नंबर डाल के मैंने खेला भी, अंडर-19 में”
“फिर उसके बाद, मुझे लगता है कि मेरे साथ में खेल रहे उस समय के खिलाड़ी, अभी मुझे नाम याद नहीं आ रहा है। उन्होंने बोला, ‘अरे भाई, ये अंडर-19 ठीक है, इंडिया टीम में खेलेगा ना तू, ये नंबर नहीं ले सकता है।’ तो मैं बोला, ‘क्यों?’ यार, तो बोले, ‘राहुल द्रविड़ का नंबर है’, और राहुल द्रविड़ उस टाइम पे 19 नंबर से खेल रहे थे, और वो कप्तान थे।”
“तो तब उसके बाद, तुरंत शाम को मैं होटल पहुंचा और मैंने मम्मी को फोन किया। मम्मी को बोला, ‘मम्मी, ये नंबर से नहीं खेल सकता हूं। अभी आप मुझे बताओ कि कौन से नंबर से खेलना चाहिए।’ तो मम्मी ने मेरे लिए ये नंबर पिक किया ’45’। मम्मी ने मुझे बोला, ‘9 नंबर से खेल, तेरे लिए अच्छा रहेगा। क्योंकि 9 नंबर चला गया था, 27 नंबर से मुझे नहीं खेलना नहीं था”
“तो मुझे 4 और 5 आजू-बाजू में बहुत अच्छा लग रहा था। तो मेरी भी मम्मी को ये फीडबैक था कि 4-5 ज्यादा अच्छा लग रहा है तो, ‘मम्मी, ये नंबर लेता हूं मैं। ये 9 भी होता है और नंबर जर्सी पर भी 4-5 बहुत अच्छा लगेगा। तो 45 नंबर के पीछे की ये कहानी है।”
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