'पागल आदमी ही ऐसा कर सकता है' शोएब अख्तर की रफ्तार पर मुन्नाफ पटेल का बड़ा बयान

‘पागल आदमी ही ऐसा कर सकता है’ शोएब अख्तर की रफ्तार पर मुन्नाफ पटेल का बड़ा बयान

150 किमी/घंटा की स्पीड के लिए शरीर तक दांव पर लगा दिया, ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ के जुनून को सलाम

Shoaib Akhtar (Image credit Twitter - X)
Shoaib Akhtar (Image credit Twitter – X)

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर को दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में गिना जाता है। उनकी 161.3 किमी/घंटा की रफ्तार आज भी क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद के रूप में दर्ज है। 1997 में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले अख्तर ने अपनी गति और आक्रामक अंदाज से बल्लेबाजों में खौफ पैदा किया।

उन्होंने अपने करियर में 46 टेस्ट में 178 विकेट, 163 वनडे में 247 विकेट और 15 टी20 मैचों में 19 विकेट लिए। हालांकि, इतनी तेज गेंदबाजी का असर उनके शरीर पर भी पड़ा और उन्हें कई चोटों का सामना करना पड़ा।

भारत के 2011 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा रहे मुन्नाफ पटेल ने शोएब अख्तर की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि एशियाई परिस्थितियों में 15 साल तक लगातार 150 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करना आसान नहीं है।

मुन्नाफ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अख्तर “पागल आदमी” हैं, क्योंकि ऐसा कारनामा कोई सामान्य खिलाड़ी नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी बताया कि अख्तर के घुटने पूरी तरह खराब हो चुके थे और उन्हें मैच खेलने के लिए इंजेक्शन तक लेने पड़ते थे। यहां तक कि रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें ठीक से चलने में 4-6 साल लग गए।

शोएब अख्तर को ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम उन्हें उनकी तेज रफ्तार और आक्रामक गेंदबाजी के कारण मिला। उनका क्रिकेट के प्रति जुनून ही था जिसने उन्हें इतनी कठिनाइयों के बावजूद मैदान पर टिके रहने की ताकत दी। उनकी कहानी यह दिखाती है कि सफलता के पीछे कितनी मेहनत और त्याग छिपा होता है।

भारतीय क्रिकेट की नई नीति की भी की तारीफ

शोएब अख्तर ने हाल ही में भारतीय क्रिकेट में आए बदलावों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं की नई रणनीति ने भारत को आगे बढ़ाया है। उन्होंने खासतौर पर युवा खिलाड़ियों को मौका देने की नीति की तारीफ की और कहा कि सही समय पर सही फैसले लेने से टीम मजबूत बनती है।

शोएब अख्तर की कहानी आज के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। उनका जुनून, मेहनत और खेल के प्रति समर्पण यह सिखाता है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो, तो मुश्किलें भी छोटी लगने लगती हैं।

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