अपनी बयानबाजी से एमएस धोनी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं वीरेंद्र सहवाग!
वीरेंद्र सहवाग 2011 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे।
अद्यतन - Jun 1, 2022 4:58 pm

पूर्व भारतीय बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग को क्रिकेट इतिहास के विस्फोटक सलामी बल्लेबाजों में से एक माना जाता है। दाएं हाथ के बल्लेबाज ने अपने पूरे करियर में एक से बढ़कर एक अच्छी पारियां खेली और मेन इन ब्लू के लिए मैच विनर बनकर सामने आए। हालांकि अनुभवी सलामी बल्लेबाज ने हाल ही में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं और बताया कि क्यों उन्होंने साल 2008 में क्रिकेट से संन्यास लेने का मन बना लिया था।
सहवाग ने खुलासा करते हुए बताया कि 2008 में वह वनडे फॉर्मेट में खराब फॉर्म से गुजर रहे थे और कप्तान एमएस धोनी ने उन्हें भारतीय टीम से भी बाहर कर दिया था। हालांकि, सहवाग को तब सचिन तेंदुलकर ने उस प्रारूप से संन्यास नहीं लेने की सलाह दी थी।
उस वक्त सचिन तेंदुलकर ने मुझे संन्यास लेने से रोका था- वीरेंद्र सहवाग
क्रिकबज के शो मैच पार्टी में सहवाग ने कहा कि, “2008 में जब हम ऑस्ट्रेलिया में थे तो मेरे दिमाग में रिटायरमेंट का ख्याल आया था। मैंने टेस्ट सीरीज में वापसी की और 150 रन बनाए। वनडे में, मैं तीन-चार प्रयासों में इतना स्कोर नहीं कर सका। तो एमएस धोनी ने मुझे प्लेइंग इलेवन से हटा दिया फिर मेरे दिमाग में वनडे क्रिकेट छोड़ने का ख्याल आया। मैंने सोचा था कि मैं केवल टेस्ट क्रिकेट खेलना जारी रखूंगा।”
सहवाग ने आगे कहा कि, “सचिन तेंदुलकर ने मुझे संन्यास लेने से रोक दिया था। उनका कहना था कि यह जीवन का बुरा दौरा है और अभी रुकने की जरूरत है। इस दौरे के बाद घर जाओ और अच्छी तरह सोचो। इसके बाद फैसला लो कि आगे क्या करना है।”
आपको बता दें कि, भारत 2008 में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज खेल रहा था। सहवाग सीरीज के पहले चार मैचों में रन नहीं बना पाए थे। उन्होंने भारत के लिए पहले चार मैचों में केवल 6, 33, 11 और 14 रन बनाए थे। नतीजतन, उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था।
दो मैचों के बाद उन्हें एक और मौका मिला, लेकिन सहवाग एक बार फिर सस्ते में आउट हो गए। हालांकि सहवाग के खराब फॉर्म के बावजूद टीम इंडिया ने उस त्रिकोणीय सीरीज को अपने नाम किया था। फिर भी, तेजतर्रार सलामी बल्लेबाज ने बाद के मैचों में टीम में वापसी की और 2013 में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला।