क्या आर्थिक संकट और हिंसा के चलते श्रीलंका दौरे से पीछे हटेगा पाकिस्तान? - क्रिकट्रैकर हिंदी

क्या आर्थिक संकट और हिंसा के चलते श्रीलंका दौरे से पीछे हटेगा पाकिस्तान?

आईपीएल के समापन के बाद इस महीने के अंत में एशिया कप 2022 के होस्टिंग अधिकारों पर निर्णय लिया जा सकता है।

Pakistan Team (Photo source: Twitter)
Pakistan Team (Photo source: Twitter)

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने हाल ही में पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए अपने 12 महीने के कार्यक्रम की घोषणा की थी। पाकिस्तान इस साल जुलाई-अगस्त में द्विपक्षीय सीरीज के लिए श्रीलंका का दौरा करेगा।

श्रीलंका वर्तमान में अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिसने देश में बहुत अशांति पैदा कर दी है, क्योंकि जनता ने सरकार के खिलाफ सड़कों पर हिंसक विरोध किया और नतीजन सरकार गिराना पड़ा।

श्रीलंका में राजनीतिक और आर्थिक तनाव इस हद तक बिगड़ गया है कि उन्होंने देश में जारी आईपीएल 2022 के प्रसारण को पूरी तरह से रोक दिया है। इसी वजह से ऑस्ट्रेलिया का श्रीलंका दौरा भी संदेह के घेरे में है। बहरहाल, पीसीबी (PCB) ने आश्वासन दिया है कि वे दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए अपनी टीम को श्रीलंका भेजेंगे और देश में हिंसक स्थिति के बावजूद द्विपक्षीय सीरीज जारी है।

श्रीलंका दौरे से हमें कोई दिक्कत नहीं: पीसीबी अधिकारी

पीसीबी (PCB) के एक अधिकारी ने द हिंदू के हवाले से कहा: “हम मुश्किल समय में भी श्रीलंका क्रिकेट का समर्थन करने के लिए हमेशा तैयार हैं और हमें टेस्ट सीरीज के लिए देश का दौरा करने में कोई दिक्कत नहीं है।”

श्रीलंका क्रिकेट (SLC) और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) ‘एमराल्ड आइलैंड’ में तनाव के बावजूद जून-जुलाई में सभी प्रारूपों की द्विपक्षीय सीरीज आयोजित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जबकि अगस्त-सितंबर में एशिया कप 2022 की श्रीलंका में  मेजबानी के उनके अधिकार खतरे में हैं।

इस बीच, अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंडियन प्रीमियर लीग के समापन के बाद इस महीने के अंत में एशिया कप 2022 के होस्टिंग अधिकारों पर निर्णय लिया जा सकता है। एसएलसी (SLC) के अधिकारी कथित तौर पर आईपीएल 2022 (IPL 2022) फाइनल के लिए अहमदाबाद के लिए उड़ान भर सकते हैं, जहां एशिया कप 2022 पर अंतिम फैसला होने की संभावना है।

जहां तक देश के राजनीतिक परिदृश्य का सवाल है, राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे ने 9 मई को महिंदा राजपक्षे के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया।