रविचंद्रन अश्विन ने सचिन तेंदुलकर को लेकर किया बड़ा खुलासा, बताया कैसे पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने उनके क्रिकेटिंग करियर को किया और भी बेहतर
सचिन तेंदुलकर ने अपने क्रिकेटिंग करियर में कुल 6 वनडे वर्ल्ड कप खेले हैं। उन्होंने भारत की ओर से (1992, 1996, 199, 2003, 2007 और 2011) वनडे वर्ल्ड कप में भाग लिया।
अद्यतन - अप्रैल 24, 2023 3:40 अपराह्न

भारत के पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर आज यानी 24 अप्रैल को अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके इस जन्मदिन पर कई क्रिकेटर्स ने सचिन को शुभकामनाएं दी और साथ ही उनको लेकर कई बातों को साझा भी किया।
भारत के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी इस बात का खुलासा किया कि उनके करियर को और बेहतर करने में सचिन तेंदुलकर ने उनकी काफी मदद की। बता दें, क्रिकेट का जितना अनुभव सचिन के पास है शायद ही उतना किसी और खिलाड़ी के पास होगा। टेस्ट और वनडे प्रारूप को मिलाकर उन्होंने अपने क्रिकेटिंग करियर में कुल 100 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़े हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है और इसको आज तक कोई भी खिलाड़ी नहीं तोड़ पाया है।
बता दें, सचिन तेंदुलकर ने अपने क्रिकेटिंग करियर में कुल 6 वनडे वर्ल्ड कप खेले हैं। उन्होंने भारत की ओर से (1992, 1996, 199, 2003, 2007 और 2011) वनडे वर्ल्ड कप में भाग लिया। 2011 वनडे वर्ल्ड कप को भारतीय टीम ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में अपने नाम किया।
रविचंद्रन अश्विन ने सचिन तेंदुलकर को लेकर कहा कि, ‘मैंने अपना कुछ क्रिकेट सचिन तेंदुलकर के साथ भी खेला और 2011 वर्ल्ड कप मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पड़ाव था। तेंदुलकर ने वर्ल्ड कप को अपने नाम करने के लिए 22 साल इंतजार किया, लेकिन आखिरी में उन्होंने इसे हासिल कर लिया। उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए काफी कड़ी मेहनत की।’
क्रिकेटर बनने के लिए उन्होंने मुझे काफी प्रेरित किया: रविचंद्रन अश्विन
अश्विन ने आगे कहा कि, ‘वो चाहते थे कि मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनूं और उन्होंने ऐसा ही किया। उन्होंने काफी कड़ी मेहनत की और अपने ऊपर भरोसा जताया। क्रिकेटर बनने के लिए उन्होंने मुझे भी काफी प्रेरित किया। भारतीय जर्सी पहनने के बाद मैंने विरोधी टीम के खिलाफ काफी अच्छा प्रदर्शन किया और हमने भी उन्हें 2011 वर्ल्ड कप डेडीकेट (dedicate) किया।
जब सचिन खेलते थे तो पूरी दुनिया की टीवी पर नजरें होती थी। उन्होंने देश को एक साथ होकर आगे चलना सिखाया। जब भी सचिन बल्लेबाजी करने के लिए उतरते थे तो ऐसा लगता था कि पूरा देश थम गया है। हम सब उनके शुक्रगुजार हैं और जो भी रिकॉर्ड उन्होंने बनाए हैं उसको तोड़ना बहुत ही मुश्किल है।’