बीसीसीआई से सम्बंधित सभी मामलों की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी - क्रिकट्रैकर हिंदी

बीसीसीआई से सम्बंधित सभी मामलों की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी

साल 2018 में कूलिंग-ऑफ अवधि का आदेश पारित किया गया था।

BCCI. (Photo by Aniruddha Chowhdury/Mint via Getty Images)
BCCI. (Photo by Aniruddha Chowhdury/Mint via Getty Images)

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी, जिसमे बीसीसीआई (BCCI) के संविधान में संशोधन याचिका भी शामिल है। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ साल 2018 में पिछला फैसला लेने वाली पीठ का हिस्सा थे।

बीसीसीआई (BCCI) ने हाल ही में अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह सहित बोर्ड के अन्य पदाधिकारियों के कार्यकाल से संबंधित अपने संविधान में संशोधन के लिए एक याचिका दायर की थी, जिस पर अब न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी।

कूलिंग-ऑफ अवधि हटवाना चाहता है बीसीसीआई

राज्य क्रिकेट संघों और बीसीसीआई (BCCI) के लिए कार्यरत अधिकारी लगातार पद पर बने नहीं रह सकते हैं, उन्हें अपना कार्यकाल समाप्त करने के बाद अनिवार्य कूलिंग-ऑफ अवधि से गुजरना होता है, जिसके बाद ही वे अपना अगला कार्यकाल शुरू कर सकते हैं, जिसे संविधान से हटाने के लिए यह याचिका दायर की गई थी।

इस बीच, भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने 24 अगस्त को बीसीसीआई (BCCI) की याचिका पर कार्यवाही करने के बाद इस मामले को न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ के पास भेज दिया, जो उस पीठ का हिस्सा थे, जिसने साल 2018 में कूलिंग-ऑफ अवधि का आदेश पारित किया था।

सीजेआई, जिन्होंने जस्टिस हिमा कोहली और सीटी रविकुमार सहित तीन सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता की, ने कहा: “मैं न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में इस पर सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन करूंगा।”

आपको बता दें, न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा की अगुवाई वाली समिति की सिफारिश के बाद, बीसीसीआई (BCCI) के संविधान में लिखा गया कि कोई भी पदाधिकारी, जिसने राज्य क्रिकेट संघ या बोर्ड में तीन-तीन साल की लगातार दो बार सेवा की है, उसे अनिवार्य रूप से तीन साल की कूलिंग-ऑफ अवधि से गुजरना होगा, उसके बाद ही वह किसी भी पद पर काम कर सकता हैं। इस सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजूरी दी थी।

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