आखिर बात क्या है! रोजर बिन्नी अभी भी सौरव गांगुली की इतनी तारीफ कर रहे हैं - क्रिकट्रैकर हिंदी

आखिर बात क्या है! रोजर बिन्नी अभी भी सौरव गांगुली की इतनी तारीफ कर रहे हैं

जब गांगुली कप्तान थे, तो उन्होंने क्रिकेटरों को बेहतर होना और लड़ना सिखाया: रोजर बिन्नी

Sourav Ganguly and Roger Binny (Image Credit: Twitter)
Sourav Ganguly and Roger Binny (Image Credit: Twitter)

भारतीय क्रिकेट में पिछले दस-बीस सालों में काफी परिवर्तन आया है। यह परिवर्तन टीम इंडिया और बीसीसीआई में भी दिखता है। कप्तान, कोच और क्रिकेट काफी कुछ बदल गया है। हाल में ही पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया है, और यह पद अब भारत के पूर्व क्रिकेटर और विश्व कप विजेता खिलाड़ी रोजर बिन्नी ने संभाला है।

बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी ने पद संभालने के बाद कहा कि, कड़े फैसले, खिलाड़ियों की फिटनेस और पूरे भारत में पिच की स्थिति सुधारना उनकी प्राथमिकता में शामिल है। और अब उन्होनें पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली कोे लेकर बड़ा बयान दिया है

क्रिकेट को बहुत जल्द बदल सकते हैं गांगुली: बिन्नी 

बीसीसीआई के नए अध्यक्ष रोजर बिन्नी ने पद भार संभालने के बाद कहा कि, ‘सौरव गांगुली एक बड़ी हस्ती हैं, वह एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने ही भारतीय क्रिकेट का चेहरा बदला है। हमने देखा कि जब वह कप्तान थे, तो वह बेहतरीन क्रिकेटर थे और हमने उन्हें लड़ने वाले क्रिकेटरों के रूप में देखा। उन्होंने बहुत सारे मैच जीते। वे बदकिस्मत थे कि 2003 का वर्ल्ड कप हार गए।’

साथ ही रोजर बिन्नी ने कहा कि ‘लेकिन उन्होंने निश्चित रूप से विचार प्रक्रिया और क्रिकेटरों के लिए खेलने की स्थिति को बदल दिया है। वह हमेशा एक बड़े आइकन हैं, खासकर युवा पीढ़ी के लिए जो आगे आ रहे हैं। वह कुछ देखने वालों में से कोई है। वह रातों-रात क्रिकेट बदल सकते हैं। गांगुली जिस तरह से खेल से संपर्क करते हैं, वह थोड़ी देर ही बात करेंगे और पर वह निश्चित रूप से लोगों को प्रभावित कर सकते हैं।’

गौरतलब है कि अभी हाल में ही बीसीसीआई की 91वीं वार्षिक मीटिंग में पूर्व विश्व कप विजेता खिलाड़ी रोजर बिन्नी को बीसीसीआई का 36वां अध्यक्ष चुना गया था। बता दें कि गांगुली और बिन्नी दोनों ने भारतीय क्रिकेट में जबरदस्त योगदान दिया है। बिन्नी ने भारत की 1983 की ऐतिहासिक विश्व कप जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जबकि गांगुली अपने समय के टेस्ट टीम के सबसे सफल कप्तान रहे थे।

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