चेतेश्वर पुजारा ने रणजी ट्रॉफी में मैच जिताने के बाद धीमी बल्लेबाजी पर दिया यह जवाब - क्रिकट्रैकर हिंदी

चेतेश्वर पुजारा ने रणजी ट्रॉफी में मैच जिताने के बाद धीमी बल्लेबाजी पर दिया यह जवाब

Cheteshwar Pujara
Cheteshwar Pujara celebrates his hundred. (Photo Source: Twitter)

टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे विश्वसनीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने एक साक्षात्कार में कहा कि कुछ लोग कह सकते हैं कि पुराना स्कूल क्रिकेट खेल रहा हूं पर मैं स्थिति के अनुसार ही खेलता हूं।

सौराष्‍ट्र जीत सकता है रणजी ट्रॉफी : सौराष्ट्र को रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचाने वाले पुजारा ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है। मैं दूसरी बार रणजी ट्रॉफी का फाइनल खेलूंगा। मैं 2016 में मुंबई में रणजी फाइनल खेल चुका हूं। उन्होंने कहा कि यह सौराष्‍ट्र के लिए विशेष पल है। हमें विश्वास है कि हम जीत सकते हैं। पूरी ताकत से खेलने के बाद भी हम दो बार टूर्नामेंट में जीत के करीब पहुंच चुके हैं।

उन्होंने कहा कि मुंबई में फाइनल खेलते समय भी वह टीम में नहीं थे इस बार भी हो सकता है कि वह उपलब्ध नहीं हो। किस्मत से इस बार हमारी टीम बेहतर नजर आ रही है। इस टीम में किस तरह की क्षमताएं हैं यह हम क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में दिखा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि क्वार्टर फाइनल में उत्तरप्रदेश के खिलाफ मुकाबला आसान नहीं था। हमने इस मैच में 372 रनों का पीछा करते हुए जीत हासिल की। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में यह कारनामा पहली बार हुआ था। यह सौराष्ट्र की ओर से खेलते हुए मेरे लिए भी सबसे बड़ी जीतों में से एक थी।

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पुजारा ने सोराष्‍ट्र के लिए इस मैच में 131 रनों की जबरदस्त पारी खेली। रोहित शर्मा ने भी उनकी इस पारी की जमकर सराहना की।

 

ऑस्ट्रेलिया में बेहतर खेलने के बाद यहां किस तरह का दबाव था : इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में मैंने काफी रन बनाए थे। उन्होंने कहा कि यहां के पीचों पर इस तरह की पारी खेलना आसान नहीं होता। यहां की परिस्थितियां वहां से पूरी तरह अलग थी। मैं क्वार्टर फाइनल से पहले थोड़ा नर्वस था क्योंकि मुझे तैयारियों के लिए ज्यादा समय नहीं मिला। सौभाग्य से नॉकआउट मैच पांच दिनों में खेला जाता है, मुझे पता था कि अगर मैं पहली पारी में ज्यादा रन नहीं बना पाया, तो दूसरी बार वापसी कर सकता हूं। हम सभी ने अच्छा खेल दिखाया और टीम ने यह मुकाबला जीत लिया।

पुजारा को होता है कि बात पर गर्व : उन्होंने कहा कि जब विपक्षी खिलाड़ी यह कहते हैं कि उन्हें भी मेरे जैसे खिलाड़ी की आवश्‍यकता है तो मुझे इस पर गर्व होता है। मैं कहता हूं कि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जो एक्सट्रा ऑर्डनरी हो, मैं यह काम पहले भी कर चुका हूं। इसी तरह से पहले टेस्ट क्रिकेट खेला जाता था। कभी-कभी कुछ लोग कहते हैं कि यह पुराने स्कूल की क्रिकेट है, लेकिन मैं पहले स्थिति को पढ़ता हूं और उसी के अनुसार बल्लेबाजी करता हूं।