कारगिल विजय दिवस पर क्रिकेट जगत के तमाम लोगों ने भारतीय सैनिकों को दी श्रद्धांजलि - क्रिकट्रैकर हिंदी

कारगिल विजय दिवस पर क्रिकेट जगत के तमाम लोगों ने भारतीय सैनिकों को दी श्रद्धांजलि

हर साल 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाता है।

Kargil Vijay Diwas (Pic Source-Twitter)
Kargil Vijay Diwas (Pic Source-Twitter)

26 जुलाई, यही वो तारीख है जिसे भारत अपनी ‘विजय’ और पाकिस्तान अपनी ‘पराजय’ के लिए कभी भूल नहीं पाएगा। भारतीय क्षेत्र में करगिल की पहाड़ियों पर कब्जा करके 16 हजार फीट की ऊंचाई पर बैठा दुश्मन सैनिक बेफिक्र बैठा था। लेकिन भारतीय जवानों के जोश, जुनून और देश भक्ति के आगे ना तो 16 हजार फीट ऊंची पहाड़ी टिकी और ना ही माइनस 10 डिग्री का पारा। करीब तीन महीने चली जंग के बाद 26 जुलाई 1999 को उन्हीं पहाड़ियों पर तिरंगे झंडे के साथ ‘भारत माता की जय’ के नारे गूंज रहे थे।

इसी वजह से हर साल 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाता है। इसी को लेकर क्रिकेट जगत के तमाम लोगों ने उन सभी लोगों को याद किया जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ यह जंग लड़ी और उन सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी।

यह भी पढ़े: MLC 2023: हेनरिक क्लासेन की तूफानी पारी के आगे बेबस दिखे MI न्यूयॉर्क, टूर्नामेंट के आखिरी लीग मैच में सिएटल ओर्कास ने जीत दर्ज की

बता दें, कारगिल लड़ाई 3 मई से 16 जुलाई तक 1999 में लड़ी गई थी जिसमें भारत के 500 से ज्यादा जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। क्रिकेट जगत के कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर इन सभी को श्रद्धांजलि दी। यह कारगिल विजय दिवस की 24वीं वर्षगांठ है।

क्रिकेट जगत के तमाम लोगों ने कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को किया नमन:

 

कारगिल विजय दिवस भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी और वीरता को सम्मान देने और स्मरण करने का एक अवसर है। इस दिन देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कारगिल युद्ध के नायकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त करने के लिए पूरे देश में कई कार्यक्रम, परेड और समारोह आयोजित किए जाते हैं। हालांकि, मुख्य समारोह लद्दाख के द्रास में करगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित किया जाता है। इस साल भी भारतीय सेना की ओर से 25 और 26 जुलाई को करगिल युद्ध स्मारक पर दो दिवसीय समारोह का आयोजन किया गया है।

बता दें, इस लड़ाई में करीब दो लाख पचास हजार गोले, बम और रॉकेट दागे गए थे। करीब 5 हजार तोपखाने के गोले, मोर्टार बम और रॉकेट 300 बंदूकें, मोर्टार और एमबीआरएल से प्रतिदिन दागे जाते थे। कहा जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह एकमात्र युद्ध था जिसमें दुश्मन सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी।

 

close whatsapp