“मैं पूरी सब्जी बेचता था ताकि…”, पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने स्ट्रगल को लेकर किया बड़ा खुलासा
मनोज तिवारी ने खुलासा किया कि वह कोलकाता में पूरी सब्जी बेचा करते थे।
अद्यतन - Jan 26, 2025 10:21 am

पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने 12 वनडे और तीन टी20 मैच में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया है। हमने हमेशा देखा है कि क्रिकेटरों से जुड़ी चमक-दमक और ग्लैमर उनके संघर्षों पर भारी पड़ जाती है। सभी क्रिकेटर एक अच्छे फैमिली बैकग्राउंड से नहीं आते।
कई क्रिकेटरों को सफलता पाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है, जिसका एक बड़ा उदाहरण मनोज तिवारी है। हाल ही में पूर्व भारतीय खिलाड़ी ने अपने संघर्षों को लेकर खुलासा करते हुए अपने फैंस को इमोशनल कर दिया है।
मनोज तिवारी ने अपने स्ट्रगल को लेकर दिया यह बयान
मनोज तिवारी ने हाल ही में Lallantop को दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि लंबे समय तक टीम इंडिया से बाहर रहने के बाद उन्होंने समय से पहले संन्यास लेने के बारे में सोचा था। हालांकि, परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने खेलना जारी रखा। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वह जब युवा थे तब नट और बोल्ट फैक्ट्री में काम करने से पहले कोलकाता के एक रेस्टोरेंट में पूरी सब्जी बेचा करते थे।
“मैंने नट और बोल्ट की फैक्टरियों में काम किया। यह तब की बात है जब मैं करीब 14 साल का था। जब मैं अंडर-16 लेवल पर खेलता था तो मुझे प्रति मैच 1200 रुपये मिलते थे। इसलिए मैंने गणित लगाया और सुनिश्चित किया कि मैं क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करूं ताकि पैसे हमेशा आते रहें। मैं फैक्टरी से भाग गया। वहां बहुत ज्यादा काम होता था। फैक्टरी मालिक हमसे काम करवाता था।”
धोनी को लेकर तिवारी ने बोली यह बात
मनोज तिवारी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 2011 में चेन्नई में अपना मेडन वनडे शतक जड़ा था, लेकिन इस मैच के बाद उन्हें कई महीनों तक दोबारा मौका नहीं मिला। एमएस धोनी उस वक्त भारत के कप्तान थे और तिवारी ने बताया कि टीम सिर्फ और सिर्फ कैप्टन के प्लानिंग से ही चलती है।
“वह कप्तान थे। टीम इंडिया कप्तान की प्लानिंग के अनुसार चलती है। स्टेट टीमों में चीजें अलग होती हैं, लेकिन टीम इंडिया में सब कुछ कप्तान पर निर्भर करता है। अगर आप देखें, कपिल देव के समय में वह ही टीम चलाते थे, सुनील गावस्कर के कार्यकाल में यह उनका फैसला था, मोहम्मद अजहरुद्दीन के कार्यकाल में भी यही होता था। उसके बाद दादा और इसी तरह के अन्य लोग। यह तब तक चलता रहेगा जब तक कोई आकर कोई नियम नहीं बनाता।”