सचिन तेंदुलकर को निखारने वाले गुरु रमाकांत आचरेकर के बारे में जानिए 10 खास बातें - क्रिकट्रैकर हिंदी

सचिन तेंदुलकर को निखारने वाले गुरु रमाकांत आचरेकर के बारे में जानिए 10 खास बातें

Ramakant Achrekar. (Photo Source: Twitter)
Ramakant Achrekar (Photo Source: Twitter)

क्रिकेट जगत को सचिन तेंदुलकर, प्रवीण आमरे और विनोद कांबली जैसे बेशकीमती हीरे देने वाले कोच रमाकांत आचरेकर का 2 जनवरी को निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। आचरेकर पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। क्रिकेट में योगदान के लिए उन्हें द्रोणाचार्य व पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। रमाकांत आचरेकर के कई किस्से मशहूर हैं। आइए जानते है उनसे जुड़ी 10 खास बातें…

एक थप्पड़ ने बदल दी सचिन की जिंदगी : एक दिन मैच खेलने के बजाए सचिन वानखेड़े स्टेडियम में हैरिस शील्ड का फाइनल देखने चला गए। रमाकांत आचरेकर को इस पर इतना गुस्सा आया कि उन्होंने सचिन को एक जोरदार थप्पड़ लगाया। उन्होंने कहा कि तुम्हें दूसरों के खेल पर ताली नहीं बजानी है, तालियां हासिल करनी हैं। इस थप्पड़ ने सचिन को क्रिकेट का भगवान बना दिया।

रिटायरमेंट के दिन की सचिन की सराहना : सचिन ने अपने करियर में कई रिकॉर्ड स्थापित किए। वह आचरेकर के सबसे प्रिय शिष्य थे लेकिन उन्होंने कभी सचिन की तारीफ नहीं की। जब सचिन ने अपने क्रिकेट करियर से संन्यास लेने की घोषणा की कि उस दिन उन्होंने कहा था कि वेलडन सचिन।

मैच के बाद सर वड़ा पाव खिलाएं तो समझो अच्छा खेला : रमाकांत आचरेकर के बारे में एक बात मशहूर थी कि भले ही कोई कितना अच्छा खेल ले, सर कभी किसी को वेल-प्लेड नहीं बोलते थे। हां, लेकिन जब कभी वो मैच के बाद सचिन को वड़ा पाव खिलाने ले जाते, तो वह समझ जाते कि आज अच्छा खेला।

क्रिकेट जगत को दिए कई दिग्गज क्रिकेटर : सचिन और कांबली के अलावा भी आचरेकरजी ने टीम इंडिया को प्रवीण आमरे, समीर दीघे, चंद्रकांत पंडित, अजित आगरकर, बलविंदर संधू जैसे कई दिग्गज खिलाड़ी दिए।

खिलाड़ी के रूप में ज्यादा सफलता नहीं : आचरेकर एक खिलाड़ी के तौर पर उतने सफल नहीं हुए जितना कि वो अपनी कोचिंग के लिए जाने गए। उन्होंने 1943 में क्रिकेट खेलना शुरू किया और 1945 में वो न्यू हिंद स्पोर्ट्स क्लब के लिए क्लब क्रिकेट खेले। उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लिए सिर्फ एक फर्स्ट क्लास क्रिकेट मैच खेला था।

प्रैक्टिस से ज्यादा खेलने पर जोर : आचरेकर सर हमेशा कहते थे कि प्रैक्टिस कम करो, मैच ज्‍यादा खेलो। उनका कहना था कि मैच खेलने से किसी भी खिलाड़ी के खेल में प्रतिस्‍पर्धा का भाव आता है और ऐसे माहौल में ही उसका सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन सामने आता है।

अनुशासन पर जोर : उन्होंने हमेशा अनुशासन पर जोर दिया। इसके लिए वह अपने शिष्यों को सख्त सजा देने से भी गुरेज नहीं करते थे। सचिन उनके प्रिय शिष्य थे पर उन्होंने कभी किसी अन्य के साथ भेदभाव नहीं किया।

सचिन से ज्यादा मेहनत आचरेकर ने की : सचिन को महान बनाने में जितनी मेहनत सचिन की है उससे कही ज्यादा मेहनत रमाकांत आचरेकर ने की। वह खुद सचिन को ज्यादा से ज्यादा खेलने का मौका देने के लिए एक मैदान से दूसरे मैदान तक भटकते। अगर आचरेकर नहीं होते तो सचिन भी इस स्तर के क्रिकेटर नहीं बन पाते।

सचिन से बेहतर थे कई खिलाड़ी : कोच आचरेकर का मानना था कि उनके कई शिष्‍य प्रतिभा के मामले में सचिन के बराबर या उससे बेहतर थे लेकिन अनुशासन ने सचिन के करियर को ऊंचाई पर पहुंचाया। कोच की ओर से दिए गए अनुशासन के पाठ को सचिन कभी नहीं भूले।

हर कदम रहे सचिन के साथ : सचिन के लिए हर मुश्किल घड़ी का सहारा उनके बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर ही थे। उन्होंने हमेशा सचिन को बेहतर करने की प्रेरणा दी। सचिन भले ही दुनिया के लिए महान बल्लेबाज हो पर आचरेकर ने हमेशा उन्हें शिष्य ही बनाए रखा और गलती सुधारने के लिए प्रेरित किया।

यह थी आचरेकर की सबसे बड़ी विशेषता : आचरेकर की कोच के तौर पर यह भी खासियत रही कि वे जिसे योग्य मानते थे उसे ही वह क्रिकेट सिखाते थे। उनके घर के बाहर क्रिकेट सीखने वालों की कतारे लगती थी पर कभी उन्हें इस बात का घमंड नहीं हुआ।

आमरे, बलविंदर जैसे कोच भी दिए : आचरेकर भले अब हमारे बीच नहीं है लेकिन उन्होंने आमरे और बलविंदर जैसे कोच भी क्रिकेट जगत को दिए हैं। इनके माध्यम से कई खिलाड़ियों को आचरेकरजी के सिखाए गुर सीखने को मिलेंगे।