वनडे वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल मुकाबले का वीरेंद्र सहवाग ने बयां किया अब यह शानदार किस्सा - क्रिकट्रैकर हिंदी

वनडे वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल मुकाबले का वीरेंद्र सहवाग ने बयां किया अब यह शानदार किस्सा

फाइनल मुकाबले में सहवाग 0 पर आउट हो गए थे और सचिन 18 रन बनाकर आउट हुए थे, दोनों ही खिलाड़ियों को लसिथ मलिंगा ने अपना शिकार बनाया था।

Sachin Tendulkar and Virender Sehwag (Photo credit should read PRAKASH SINGH/AFP/Getty Images)
Sachin Tendulkar and Virender Sehwag (Photo credit should read PRAKASH SINGH/AFP/Getty Images)

2011 वनडे वर्ल्ड कप को हुए लगभग 11 साल हो गए हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा लगता है कि मानो यह कुछ दिन पहले की ही बात हो। 2 अप्रैल 2011 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 6 विकेट से मात देकर विश्व विजेता बनी थी। इस टूर्नामेंट में भारत के ऐसे कई खिलाड़ी थे जो अगर उस टीम में शामिल ना होते तो शायद भारत यह वर्ल्ड कप कभी नहीं जीत पाता।

वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, एम एस धोनी, जहीर खान और कई खिलाड़ियों की वजह से यह कप 2011 में हमारे नाम हुआ था। इसी के साथ भारतीय टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने 2011 को लेकर एक मजेदार किस्सा बताया।

वीरेंद्र सहवाग का बल्ला 2011 वर्ल्ड कप में खूब चला था। उन्होंने इस वर्ल्ड कप में एक रिकॉर्ड और भी बनाया था। यह रिकॉर्ड था लगातार पांच मुकाबलों में मैच की पहली गेंद पर चौका मारना। हालांकि फाइनल में सहवाग का बल्ला नहीं चला था लेकिन उनके साथी सचिन तेंदुलकर ने इस मुकाबले में कुछ अच्छे शॉट्स मारे थे।

इस मुकाबले में सहवाग 0 पर आउट हो गए थे और सचिन 18 रन बनाकर आउट हुए थे। दोनों खिलाड़ियों का विकेट श्रीलंका के तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा ने लिया था। सहवाग ने बताया कि उन्होंने और सचिन तेंदुलकर ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में बड़ी शुरुआत लेने का निर्णय लिया था।

2011 वर्ल्ड कप में 0 पर आउट हुए थे वीरेंद्र सहवाग

बात करें 2011 वनडे वर्ल्ड कप की तो फाइनल मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई टीम ने 50 ओवर में 274 रन बनाए। श्रीलंका की ओर से महेला जयवर्धने ने 88 गेंदो में 103 रन की नाबाद पारी खेली। वानखेड़े की पिच बल्लेबाजी करने के लिए काफी अच्छी थी इसलिए सचिन और सहवाग दोनों ही इस पिच पर अपनी बल्लेबाजी आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। हालांकि लसिथ मलिंगा ने उनके इस आइडिया पर पानी फेर दिया और 31 रन के अंदर दोनों को पवेलियन का रास्ता दिखाया।

सहवाग ने क्रिकबज से बात करते हुए कहा कि, आपको 2011 का एक मजेदार किस्सा सुनाता हूं जब हम लोग गेंदबाजी कर रहे थे तो सचिन तेंदुलकर मिडविकेट पर खड़े थे और मैं डीप स्क्वायर लेग में। जैसे ही सूरज डूबने लगा हमने पिच पर एक अलग ही चमक देखी। हमने पिच को देखा और उसके बाद एक दूसरे को देखकर सिग्नल दिया की पिच बल्लेबाजी के लिए काफी अच्छी है।

सारी बातें जैसे की मुंबई की गर्मी थी, विकेट पूरी तरीके से फ्लैट था, तो सबसे अच्छा यही था कि टॉस जीतो और बल्लेबाजी का फैसला करो। अगर यह पिच ऐसी होती जिसमें आप रन नहीं बना सकते हैं तो शायद आप रन कभी नहीं बना सकते हैं। ये बात साफ है।

हालांकि दो विकेट गिरने के बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली ने टीम को मुश्किल परिस्थितियों से निकाला। विराट ने इस मुकाबले में 35 रन बनाए जबकि गौतम गंभीर 97 रन की अहम पारी खेल आउट हुए। मैच जिताने का काम खुद कप्तान एमएस धोनी ने किया और उनके 91 रन की पारी की बदौलत और उस यादगार छक्के की बदौलत 2011 का वर्ल्ड कप इंडिया के नाम हुआ।