उस समय मैं प्रसारक के रूप में बिल्कुल भी निष्पक्ष नहीं होना चाहता था: आकाश चोपड़ा - क्रिकट्रैकर हिंदी

उस समय मैं प्रसारक के रूप में बिल्कुल भी निष्पक्ष नहीं होना चाहता था: आकाश चोपड़ा

एक प्रचारक के रूप में हम सब को कहा जाता है कि आपको सभी टीमों को एक ही नजरिए से देखना होगा। आपको निष्पक्ष होकर बोलना होगा: आकाश चोपड़ा

Aakash Chopra. (Photo Source: Instagram)
Aakash Chopra. (Photo Source: Instagram)

आकाश चोपड़ा ने उस समय को याद किया जब उन्होंने क्रिकेट प्रसारक के रूप में अपने तटस्थता को हटाने का विकल्प बना लिया था। बता दें, चोपड़ा ने भारतीय टीम की ओर से 10 टेस्ट मुकाबलों में 23 के औसत से 437 रन बनाए हैं। 2003-04 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में उन्होंने वीरेंद्र सहवाग के साथ ओपनिंग की थी और टीम के लिए महत्वपूर्ण रन बनाए थे। एक खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद उन्होंने प्रसारक की नई भूमिका चुनी और इस भूमिका में उन्होंने अभी तक शानदार काम किया है।

आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल में एक वीडियो को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने एक बार प्रसारकों का एक नियम तोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि, ‘एक प्रसारक के रूप में हम सब को कहा जाता है कि आपको सभी टीमों को एक ही नजरिए से देखना होगा। आपको निष्पक्ष होकर बोलना होगा। कभी ये नहीं बोलना होगा कि हमारे और उनके बीच में लड़ाई है। हमेशा बोलिए भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड बनाम भारत।

लेकिन हां एक बार ऐसा हुआ था जब मैंने भारतीय झंडे को अपने दिल से लगाया। मुझे लगा कि 16 खिलाड़ियों की भारतीय टीम पूरे देश के खिलाफ खेल रही है। यह था साल 2018-19 और मैं ऑस्ट्रेलिया में था। इस दौरे में मैं इकलौता भारतीय कमेंटेटर था।

भारत के लिए खेलना एक अलग ही खुशी देता है: आकाश चोपड़ा

मुझे लगा कि हमारे खिलाफ सभी लोग इकट्ठा हो रहे हैं और एक पहाड़ सा बना रहे हैं। तमाम पूर्व क्रिकेटर, मीडिया सभी लोग भारतीय टीम के खिलाफ जा रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि, ‘मैंने सोचा अब अपने न्यूट्रल तरफ को हटाते हैं और भारतीय झंडे को फहराते हैं। हम लोग वहां जीते और मैं इतना खुश था कि आपको बता नहीं सकता। बता दें, भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उस सीरीज में 2-1 से मात दी थी।

आकाश चोपड़ा ने आगे कहा कि, ‘मेरे प्रसारक की जिंदगी में मैं पहली बार चीयरलीडर बना हुआ था। मैं बस यह सोच रहा था कि अगर वहां भारतीय टीम के 16 खिलाड़ी मौजूद है तो मैं 17वां खिलाड़ी बन जाऊं। मैं बस उस ग्रुप का हिस्सा बनना चाहता था। भारत के लिए खेलना एक अलग ही खुशी देता है। ऐसा लगता है मानिए आपको सब कुछ मिल गया हो।