रोहित शर्मा ने अपनी कप्तानी को लेकर रखा पक्ष, कहा सबसे मुश्किल होता है ‘ना’ कहना

रोहित शर्मा ने अपनी कप्तानी को लेकर रखा पक्ष, कहा सबसे मुश्किल होता है ‘ना’ कहना

टीम चयन, सीनियर खिलाड़ियों से बातचीत और बड़े टूर्नामेंटों से पहले लिए गए कठिन फैसलों पर खुलकर बोले भारतीय कप्तान

Rohit Sharma (image via getty)
Rohit Sharma (image via getty)

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में रोहित शर्मा के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमेशा सभी खिलाड़ियों को खुश रखना नहीं रही। हाल ही में एक शो के दौरान रोहित ने अपनी कप्तानी के अनुभव साझा करते हुए कहा कि नेतृत्व का असली मतलब है कठिन फैसले लेना और उनसे होने वाली निराशा को स्वीकार करना।

रोहित शर्मा ने जियोहॉटस्टार के एक कार्यक्रम में कहा, आप सबको खुश नहीं रख सकते। उनके अनुसार, भारतीय टीम का कप्तान होना आसान नहीं होता, क्योंकि हर फैसले पर करोड़ों लोगों की नजर रहती है और उम्मीदें हमेशा बहुत ऊंची होती हैं। खासतौर पर बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम चयन से जुड़े फैसले सबसे ज्यादा मुश्किल होते हैं।

रोहित ने साल 2022 का उदाहरण दिया, जब श्रेयस अय्यर को एशिया कप और टी20 वर्ल्ड कप टीम में जगह नहीं मिली थी। इस फैसले पर काफी चर्चा हुई थी। रोहित ने साफ किया कि यह फैसला श्रेयस की फॉर्म या काबिलियत के कारण नहीं लिया गया था।

टीम मैनेजमेंट को उस समय ऐसे खिलाड़ी की जरूरत थी जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी योगदान दे सके। इस वजह से दीपक हुड्डा को चुना गया, क्योंकि वह ऑलराउंड विकल्प देते थे।

कठिन फैसलों पर रोहित की साफ सोच और खुली बातचीत

रोहित ने कहा कि इस फैसले से श्रेयस को जरूर निराशा हुई होगी, जबकि दीपक खुश रहे होंगे, लेकिन क्रिकेट में ऐसा ही होता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने और तत्कालीन कोच राहुल द्रविड़ ने खुद श्रेयस अय्यर से बात कर फैसले की वजह समझाई, ताकि खिलाड़ी को यह महसूस न हो कि उसके साथ अन्याय हुआ है।

इसी तरह, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी से मोहम्मद सिराज का बाहर होना और 2023 वनडे वर्ल्ड कप में युजवेंद्र चहल को मौका न मिलना भी उनके लिए आसान फैसले नहीं थे। हर बार टीम की जरूरत और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया गया।

रोहित का मानना है कि अगर फैसले के पीछे सही वजह हो और उसे ईमानदारी से समझाया जाए, तो वह सही माना जाता है। कप्तानी के दौरान रोहित ने टीम में खुला और सकारात्मक माहौल बनाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने खिलाड़ियों को न सिर्फ क्रिकेट बल्कि निजी समस्याओं पर भी खुलकर बात करने की आजादी दी। उनके अनुसार, आपसी सम्मान और हल्का-फुल्का माहौल टीम को मजबूत बनाता है। रोहित की यह सोच बताती है कि सच्ची कप्तानी तालियों से नहीं, बल्कि ईमानदार फैसलों और उन्हें निभाने के हौसले से पहचानी जाती है।

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