2014 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में विलेन बने थे युवराज सिंह, अब इमेज सुधारने में लगे हैं! - क्रिकट्रैकर हिंदी

2014 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में विलेन बने थे युवराज सिंह, अब इमेज सुधारने में लगे हैं!

युवराज सिंह ने 2014 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में अपनी धीमी पारी को लेकर किया बड़ा खुलासा।

Yuvraj Singh. (Photo by Scott Barbour/Getty Images)
Yuvraj Singh. (Photo by Scott Barbour/Getty Images)

पूर्व भारतीय ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अपने करियर में कई ऐतिहासिक पारियां खेली और भारतीय क्रिकेट टीम की कई यादगार जीत में शानदार योगदान दिया। लेकिन साल 2014 के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में युवराज सिंह की बल्लेबाजी बड़ी फीकी थी, जिसके लिए उन्हें काफी आलोचना शिकार होना पड़ा था, क्योंकि टीम इंडिया को श्रीलंका के खिलाफ छह विकेट की हार का सामना करना पड़ा था।

दरअसल, युवराज सिंह ने 2014 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 21 गेंदों में 11 रन बनाए थे, वहीं भारतीय टीम 20 ओवरों में केवल 130 रन ही बना पाई थी। ढाका के शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में श्रीलंका क्रिकेट टीम इस लक्ष्य का पीछा बड़ी आसानी से करने में सफल रही और अपना पहला टी-20 वर्ल्ड कप खिताब भी जीता। हाल ही में, अपनी इस धीमी पारी को लेकर दिग्गज ऑलराउंडर ने बड़ा खुलासा किया है।

युवराज सिंह ने 2014 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में अपनी धीमी पारी को लेकर दिया बड़ा बयान

युवराज सिंह ने खुलासा किया है कि उनका आत्मविश्वास टीम प्रबंधन से समर्थन नहीं मिलने के कारण बहुत प्रभावित हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप फाइनल में उनका बल्ले के साथ डरवाना प्रदर्शन सामने आया।

न्यूज18 के साथ एक इंटरव्यू में युवराज सिंह ने बताया: “2014 के टी20 वर्ल्ड कप के दौरान मेरा आत्मविश्वास काफी गिरा हुआ था। ऐसा माहौल था कि मुझे टीम बाहर भी किया जा सकता था। ये कोई बहाना नहीं है, लेकिन टीम की तरफ से मुझे कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा था। गैरी कर्स्टन के बाद मैं डंकन फ्लेचर के युग में था और चीजें पूरी तरह से बदल चुकी थीं। मैं फाइनल मैच में गेंद पर प्रहार तक नहीं कर पा रहा था।”

दिग्गज ऑलराउंडर ने आगे बताया, “मैंने ऑफ-स्पिनर को मारने की कोशिश की, लेकिन नहीं हो पाया। मैंने आउट होने की भी कोशिश की, लेकिन वो भी नहीं हुआ। सबको लगा कि मेरा करियर खत्म हो गया है, यहां तक कि मुझे भी लगा। लेकिन यही जीवन है, आपको हार-जीत सब स्वीकार करना पड़ता है। यदि आप गौरव को स्वीकार करते हैं, तो आपको अपनी हार भी स्वीकार करनी चाहिए और आपको आगे बढ़ना चाहिए।

close whatsapp