क्या भारत से छिन सकती है वर्ल्ड कप 2023 की मेजबानी? आईसीसी और बीसीसीआई में पंगा तय
बीसीसीआई पिछली बार भी केंद्र सरकार से कराधान के मामले को सुलझा नहीं पाया था।
अद्यतन - दिसम्बर 17, 2022 12:57 अपराह्न

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अगले साल भारत में आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 की मेजबानी को लेकर मुश्किल में फंस गया है, क्योंकि इस बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) कथित तौर पर टैक्स छूट के मामले में बोर्ड की कोई मदद नहीं करना चाहता है।
खबरों के अनुसार अगर बीसीसीआई भारत सरकार के साथ 2023 वनडे वर्ल्ड कप के लिए कर मसले को सुलझा पाने में असफल रहता है, तो आईसीसी कठिन फैसला लेने में कोई देर नहीं करेगा, जिसका मतलब है कि भारत से मेगा इवेंट की मेजबानी भी छीनी जा सकती है, और अगर ऐसा नहीं भी होता है, तो बीसीसीआई को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
भारत से छिन सकती है 2023 वर्ल्ड कप की मेजबानी?
आपको बता दें, बीसीसीआई पिछली बार भी केंद्र सरकार से कराधान के मामले को सुलझा नहीं पाया था, जब भारत ने 2016 टी-20 वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। आईसीसी ने उस समय बीसीसीआई के हिस्से से 10.3% यानी लगभग 190 करोड़ रुपये काट लिए थे, जिसके लिए अभी भी कानूनी लड़ाई जारी है।
इस बीच, आईसीसी ने बीसीसीआई से वर्ल्ड कप 2023 के लिए भारत सरकार से कर छूट की मांग के लिए कहा था, जिसे लेकर भारत को अब तक कोई पॉजिटिव संकेत नहीं मिले हैं, जिसे देखते हुए देश में टूर्नामेंट की मेजबानी बुरी तरह खतरे में नजर आ रही है।
आईसीसी ने कथित तौर पर पहले ही वर्ल्ड कप 2023 के लिए प्रसारण राजस्व से 21.84% (करीब 900 करोड़ रुपये) का टैक्स बिल तैयार कर लिया है। वहीं, बीसीसीआई 2016 टी-20 वर्ल्ड कप के लिए सरकार को कर छूट के लिए मना नहीं पाया था, और इस बार भी यही कहानी हो सकती है।
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई ने पहले ही आईसीसी को सूचित कर दिया है कि कर छूट के मामले में “कुछ भी नहीं किया जा सकता है”, जिसका मतलब है कि 2023 वर्ल्ड कप को कहीं और शिफ्ट किया जा सकता है। ‘यह बीसीसीआई का पैसा है। अगर आईसीसी वर्ल्ड कप से पहले इस मुद्दे को सुलझा नहीं पाता है और इसे आईसीसी से मिलने वाले भारत के राजस्व हिस्से से घटाती है, तो भी एक बार फिर कानूनी लड़ाई छिड़ जाएगी। और अगर आईसीसी भारत से आने वाले टैक्स के पैसो में छूट देने के लिए सहमत हो भी जाता है, तो अन्य सदस्य देश और बोर्ड इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे।’