'मुझे पता था कि मैं कभी सहवाग जैसा नहीं बन सकता'- संन्यास के बाद 10 साल बाद द्रविड़ का बयान - क्रिकट्रैकर हिंदी

‘मुझे पता था कि मैं कभी सहवाग जैसा नहीं बन सकता’- संन्यास के बाद 10 साल बाद द्रविड़ का बयान

एक पॉडकास्ट 'इन द जोन' में द्रविड़ ने खुलासा करते हुए बताया कि कैसे वह किसी मैच के बाद दबाव से हटने की कोशिश करते थे।

Virender Sehwag & Rahul Dravid  (Image Credit- Instagram)
Virender Sehwag & Rahul Dravid (Image Credit- Instagram)

वर्तमान में भारतीय टीम के हेड कोच होने के अलावा, राहुल द्रविड़ भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक रहे हैं। वह वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण के साथ भारत के ‘फैब 5’ का हिस्सा थे, जिन्होंने एक दशक से अधिक समय तक एक टीम इंडिया के लिए मजबूत बल्लेबाजी लाइन-अप बनाया।

हालांकि, ज्यादातर मौकों पर द्रविड़ टीम के लिए एक अनसंग हीरो थे। भारत के महान बल्लेबाजों में शुमार द्रविड़ को भी कभी दबाव झेलना पड़ा था। हालांकि, हर मौके पर द्रविड़ ने शानदार वापसी की और खूब रन बनाए। दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज गेंदबाज उनके सामने संघर्ध करते हुए नजर आते थे।

सहवाग की तरह नहीं बनने वाले थे द्रविड़

राहुल द्रविड़ भी ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें अगर कभी किसी मैच में मौका नहीं मिलता था तो वो अपने खेल को लेकर काफी कुछ सोचने लगते थे। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा के साथ उनके पॉडकास्ट ‘इन द ज़ोन’ पर बात करते हुए, द्रविड़ ने बताया कि कैसे उन्हें खेल से मानसिक ब्रेक लेने के महत्व का एहसास हुआ।

उन्होंने कहा कि, “मैं बहुत सारी ऊर्जा खर्च करता था। जब मैं नहीं खेल रहा होता तो भी अपने खेल के बारे में सोच रहा होता था, उस पर चिंतन कर रहा था और बेवजह चिंतित होता था। समय के साथ मैंने सीखा कि यह वास्तव में मेरे खेल में मदद नहीं कर रहा था या मुझे बेहतर खेलने में मदद नहीं कर रहा था। मुझे इससे बाहर निकलने के लिए कुछ नया करने की जरूरत थी और क्रिकेट के बाहर का जीवन को तराशने की जरूरत थी।”

द्रविड़ ने यह भी बताया कि क्यों सहवाग जैसे हंसमुख चरित्र को खेल से अलग होना थोड़ा आसान लगता था। द्रविड़ ने कहा- मैं कभी भी वीरेंद्र सहवाग की तरह नहीं बनने वाला था। सहवाग के लिए मैदान के बाहर निकलते ही खुद को रिलैक्स करना आसान था, क्योंकि उनकी पर्सनैलिटी शानदार थी।

मैं उस स्तर तक कभी नहीं पहुंचने वाला था, लेकिन निश्चित रूप से मैंने खतरे को पहचाना। मुझे पता था कि मुझे बेवजह चिंतित हो जाने से बाहर निकलने की जरूरत है। इसके लिए मुझे मानसिक पक्ष को मजबूत करना था।

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