युवराज ने हटाया पर्दा, कैसे सचिन की डबल सेंचुरी की राह में ‘दीवार’ बन गए ‘द वॉल’ - क्रिकट्रैकर हिंदी

युवराज ने हटाया पर्दा, कैसे सचिन की डबल सेंचुरी की राह में ‘दीवार’ बन गए ‘द वॉल’

26 फर्स्ट क्लास शतक होने के बावजूद युवराज को लगता है कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट में ज्यादा मौके नहीं दिए गए।

Yuvraj Singh. (Photo by Boris Streubel/Getty Images for Laureus)
Yuvraj Singh. (Photo by Boris Streubel/Getty Images for Laureus)

मार्च 29 2004 का दिन सभी भारतवासियों के लिए एक ऐसा दिन है जिसको वो कभी नहीं भुला पाएंगे। इसी दिन वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में ट्रिपल सेंचुरी जड़ी थी और वो ऐसा करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने थे। लेकिन इससे ज्यादा बड़ा क्षण रहा राहुल द्रविड़ का पारी घोषित करना जब सचिन तेंदुलकर 194 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे।

उस समय युवराज सिंह भी इस मुकाबले में सचिन के साथ क्रीज पर थे। उन्होंने कहा कि हमें बीच में यह संदेश मिला कि हम लोगों को जल्दी खेलना है और पारी को घोषित करना है।

युवराज सिंह ने स्पोर्ट्स18 के नए शो होम ऑफ हीरोज़ में कहा कि, मैं अपना पहला टेस्ट अर्धशतक बनाकर आउट हो गया । जैसे ही मैं आउट हुआ वैसे ही कप्तान राहुल द्रविड़ ने पारी को घोषित कर दिया जबकि सचिन 194 पर खेल रहे थे। उन्होंने कहा कि सचिन 6 रन अगले 2 से 3 ओवर में बना लेते और उसके बाद हम पारी घोषित करके 8-10 ओवर गेंदबाजी कर सकते थे। मुझे नहीं लगता कि उस टेस्ट मैच में अगले 2 ओवर में कुछ फर्क डालते।

उन्होंने आगे कहा कि, वह मुकाबले का तीसरा या चौथा दिन था। आपको अपनी टीम को पहले रखना चाहिए था और जब वो 150 बना लेते तब आप पारी घोषित कर सकते थे। सोच का फर्क है। आप टीम की पारी घोषित उनके 200 के बाद भी कर सकते थे।

युवराज ने अगले टेस्ट मुकाबले में शतक जड़ा और तीन टेस्ट श्रृंखला में 57.50 की औसत से 200 से ज्यादा रन बनाए। लेकिन युवराज टेस्ट क्रिकेट में ज्यादा मुकाबले नहीं खेल पाए। 26 फर्स्ट क्लास शतक होने के बावजूद युवराज को लगता है कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट में ज्यादा मौके नहीं दिए गए।

मैंने लाहौर में शतक जड़ा और अगले टेस्ट में मुझे ओपन करने को कहा गया: युवराज

युवराज ने कहा कि पहले और अब में बहुत फर्क है। अगर दोनों युग को मिला लिया जाए तो अब खिलाड़ियों को 10 से 15 मुकाबले अपनी क्षमता दिखाने के लिए मिल जाते हैं। पहले के युग में आप देख सकते हैं कि वीरेंद्र सहवाग टेस्ट में कैसी शुरुआत देते थे। उनके बाद राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और लक्ष्मण। मैंने लाहौर में शतक जड़ा था और उसके बाद मुझे अगले टेस्ट में ओपन करने को कहा गया।

युवराज ने इस बात पर हामी भरी है कि कई ऐसे मुकाबले हुए जिसमें वह अपने 60 रनों को शतक में तब्दील नहीं कर पाए और सिर्फ 40 टेस्ट मुकाबले ही खेल सके। उन्होंने कहा कि जब मुझे दादा के रिटायरमेंट के बाद टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला तो मुझे कैंसर हो गया। मेरी किस्मत ने मेरा साथ नहीं दिया। मैं चाहता था कि लगभग 100 टेस्ट मुकाबले जरूर खेलूं, तेज गेंदबाजों की गेंदो पर प्रहार कर सकूं और कम से कम 2 दिन तक बल्लेबाजी जरूर करूं। लेकिन मुझे लगता है कि टेस्ट क्रिकेट मेरे लिए नहीं था।