क्विंटन डी कॉक ने नहीं दिया ब्लैक लाइव्स मैटर्स आंदोलन में अपना समर्थन, तो सलमान बट हुए हैरान - क्रिकट्रैकर हिंदी

क्विंटन डी कॉक ने नहीं दिया ब्लैक लाइव्स मैटर्स आंदोलन में अपना समर्थन, तो सलमान बट हुए हैरान

वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में डी कॉक को दक्षिण अफ्रीका मैनेजमेंट ने टीम से बाहर कर दिया था।

Salman Butt. (Photo Source: YouTube)
Salman Butt. (Photo Source: YouTube)

टी-20 वर्ल्ड कप में 26 अक्टूबर को वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका के बीच मैच खेला गया, जिसमें दक्षिण अफ्रीकी टीम को जीत जरूर मिली लेकिन मैच से पहले टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक विवादों की वजह से टीम से बाहर हो गए। दरअसल, इस मैच से पहले दक्षिण अफ्रीका बोर्ड ने आगामी सभी मैचों के लिए दिशानिर्देश जारी किए जिसमें कहा गया कि इस वर्ल्ड कप के सभी मैचों में टीम के खिलाड़ियों को ब्लैक लाइव्स मैटर्स आंदोलन में अपना समर्थन देना होगा।

लेकिन इसी बीच क्विंटन डी कॉक ने इस नस्लवाद के अभियान में अपना समर्थन देने से इंकार कर दिया और इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने उन्हें मैच से ही बाहर कर दिया। अब उनके इस कदम पर पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलमान बट ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

सलमान बट ने डी कॉक के निर्णय पर जताई हैरानी

क्विंटन डी कॉक के फैसले पर सलमान बट ने अपने यूट्यूब चैनल में कहा कि, “उन्होंने जो किया, वह वाकई में बहुत अजीब था। हर कोई ब्लैक लाइव्स मैटर्स में भाग ले रहा है। यह मूल रूप से यही दर्शाता है कि सभी इंसान समान हैं और किसी को भी रंग या नस्ल के आधार पर विभाजित नहीं करना चाहिए।”

उन्होने आगे कहा कि, “यह दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट द्वारा सभी के लिए तय किया गया था, लेकिन डी कॉक का यह फैसला लोगों को एकजुट नहीं करेगा बल्कि विभाजन पैदा करेगा। मैं वास्तव में नहीं जानता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।”

बट ने आगे अपने वीडियो में कहा कि, “टीम के अंदर मौजूदा विचार नेल्सन मंडेला द्वारा प्रचारित विचारों के बिल्कुल विपरीत हैं। डी कॉक ऐसे देश में रहते हैं जहां दोनों जातियों के लोग बहुतायत में हैं। यह निश्चित रूप से नेल्सन मंडेला के विचारों वाला दक्षिण अफ्रीका नहीं है, जब दक्षिण अफ्रीका में हालात सुधरे और उन्होंने खुद को बाकी दुनिया के साथ वापस मिला लिया। चीजें खराब हो गई हैं, हर कोई इसे कर रहा है और संदेश सरल है कि हर कोई समान है।”

पूर्व सलामी बल्लेबाज ने आगे कहा कि “एक टीम के अंदर विचारों और विचारधाराओं में इतना अंतर होना आदर्श नहीं है। उनकी टीम कोटा सिस्टम पर चल रही है। उनके पहले मैच में भी एक तस्वीर ऐसी थी जिसमें टीम के कुछ लोग बैठे थे और कुछ खड़े थे। उनकी राय, विश्वास या सांस्कृतिक मतभेद इतने अधिक प्रदर्शित नहीं होने चाहिए। वो यहां क्रिकेट खेलने आए हैं।”